बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब प्रभु रिषिन्ह समेत नहाए। बिबिध दान महिदेवन्हि पाए।।
मूल पाठ
तब प्रभु रिषिन्ह समेत नहाए। बिबिध दान महिदेवन्हि पाए।।
हरषि चले मुनि बृंद सहाया। बेगि बिदेह नगर निअराया।।
स्रोत अभिलेख 1.212 · पुस्तक पृ. 210, 211
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब प्रभुने ऋषियोंसहित [गङ्गाजीमें] स्नान किया। ब्राह्मणोंने भाँति-भाँतिके दान पाये। फिर मुनिवृन्दके साथ वे प्रसन्न होकर चले और शीघ्र ही जनकपुरके निकट पहुँच गये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 210 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तब प्रभु रिषिन्ह समेत नहाए। बिबिध दान महिदेवन्हि पाए।।
English explanation
Then Lord Rama bathed with the sages, and the Brahmins received various gifts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| रिषिन्ह | ऋषियों के | the sages |
| समेत | साथ | together with |
| नहाए | स्नान किया | bathed |
| बिबिध | विविध प्रकार के | various |
| दान | दान | gifts given in charity |
| महिदेवन्हि | ब्राह्मणों ने | the Brahmins |
| पाए | प्राप्त किए | received |
2 हरषि चले मुनि बृंद सहाया। बेगि बिदेह नगर निअराया।।
English explanation
They proceeded joyfully with the company of sages and soon drew near the city of Janaka, king of Videha.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरषि | प्रसन्न होकर | joyfully |
| चले | चले | proceeded |
| मुनि | मुनियों का | of sages |
| बृंद | समूह | company |
| सहाया | साथ लेकर | in company with |
| बेगि | शीघ्र | quickly |
| बिदेह | विदेह जनक की | of Janaka, king of Videha |
| नगर | नगरी | city |
| निअराया | निकट आ गए | drew near |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.212
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 210
- सहायक विषय
- अहल्या-उद्धार
- मुद्रित पृष्ठ
- 210, 211
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।