बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब नारद हरि पद सिर नाई। चले हृदयँ अहमिति अधिकाई।।
मूल पाठ
तब नारद हरि पद सिर नाई। चले हृदयँ अहमिति अधिकाई।।
श्रीपति निज माया तब प्रेरी। सुनहु कठिन करनी तेहि केरी।।
स्रोत अभिलेख 1.129 · पुस्तक पृ. 139, 140
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब नारदजी भगवान्के चरणोंमें सिर नवाकर चले। उनके हृदयमें अभिमान और भी बढ़ गया। तब लक्ष्मीपति भगवान्ने अपनी मायाको प्रेरित किया। अब उसकी कठिन करनी सुनो॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 140 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तब नारद हरि पद सिर नाई। चले हृदयँ अहमिति अधिकाई।।
English explanation
Then Narada bowed his head at Hari’s feet and departed, with heightened self-pride in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| नारद | देवर्षि नारद | Narada, the divine sage |
| हरि | भगवान विष्णु के | of Lord Vishnu |
| पद | चरणों में | at the feet |
| सिर | सिर | head |
| नाई | झुकाकर | having bowed |
| चले | चले गए | departed |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| अहमिति | अहंभाव | self-pride |
| अधिकाई | बढ़ा हुआ | heightened |
2 श्रीपति निज माया तब प्रेरी। सुनहु कठिन करनी तेहि केरी।।
English explanation
Then the Lord, Lakshmi’s consort, set his own Maya in motion. Listen to her extraordinary, baffling deed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्रीपति | लक्ष्मीपति भगवान विष्णु | Vishnu, Lakshmi’s consort |
| निज | अपनी | his own |
| माया | माया-शक्ति को | power of illusion |
| तब | तब | then |
| प्रेरी | प्रेरित किया | set in motion |
| सुनहु | सुनो | listen |
| कठिन | दुर्बोध, विस्मयकारी | baffling, extraordinary |
| करनी | करनी | deed |
| तेहि | उस माया की | that Maya |
| केरी | की | of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.129
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 140
- सहायक विषय
- नारदका अभिमान और मायाका प्रभाव
- मुद्रित पृष्ठ
- 139, 140
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