बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब कर अस बिमोह अब नाहीं। रामकथा पर रुचि मन माहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमुझे अब पहले-जैसा मोह नहीं है, अब तो मेरे मनमें रामकथा सुननेकी रुचि है। हे शेषनागको अलंकाररूपमें धारण करनेवाले देवताओंके नाथ! आप श्रीरामचन्द्रजीके गुणोंकी पवित्र कथा कहिये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 123 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तब कर अस बिमोह अब नाहीं। रामकथा पर रुचि मन माहीं।।
कहहु पुनीत राम गुन गाथा। भुजगराज भूषन सुरनाथा।।
स्रोत अभिलेख 1.109 · पुस्तक पृ. 122, 123
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तब कर अस बिमोह अब नाहीं। रामकथा पर रुचि मन माहीं।।
English explanation
I no longer have the delusion I had then; my mind is now drawn to Rama’s story.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | उस समय | that time |
| कर | का | of |
| अस | ऐसा | such |
| बिमोह | गहरा मोह; भ्रम | delusion |
| अब | अब | now |
| नाहीं | नहीं है | is no longer present |
| रामकथा | राम की कथा | Rama’s story |
| पर | के प्रति | toward |
| रुचि | रुचि | interest |
| मन | मन | the mind |
| माहीं | में | in |
2 कहहु पुनीत राम गुन गाथा। भुजगराज भूषन सुरनाथा।।
English explanation
O lord of the gods, who wears the serpent king as an ornament, please recount the sacred tale of Rama’s virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहहु | सुनाइए | please recount |
| पुनीत | पवित्र | sacred |
| राम | भगवान राम के | of Lord Rama |
| गुन | गुणों की | virtues |
| गाथा | गाथा; कथा | tale |
| भुजगराज | सर्पों के राजा को | the king of serpents |
| भूषन | आभूषण बनाने वाले | wearing as an ornament |
| सुरनाथा | हे देवताओं के स्वामी शिव | O Shiva, lord of the gods |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.109
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 123
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 122, 123
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।