बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अजहूँ कछु संसउ मन मोरे। करहु कृपा बिनवउँ कर जोरें।।
मूल पाठ
अजहूँ कछु संसउ मन मोरे। करहु कृपा बिनवउँ कर जोरें।।
प्रभु तब मोहि बहु भाँति प्रबोधा। नाथ सो समुझि करहु जनि क्रोधा।।
स्रोत अभिलेख 1.109 · पुस्तक पृ. 122, 123
भावार्थ
मूल पाठ के बादअब भी मेरे मनमें कुछ सन्देह है। आप कृपा कीजिये, मैं हाथ जोड़कर विनती करती हूँ। हे प्रभो! आपने उस समय मुझे बहुत तरहसे समझाया था [फिर भी मेरा सन्देह नहीं गया], हे नाथ! यह सोचकर मुझपर क्रोध न कीजिये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 123 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अजहूँ कछु संसउ मन मोरे। करहु कृपा बिनवउँ कर जोरें।।
English explanation
Some doubt still remains in my mind; please show kindness—I beseech you with folded hands.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अजहूँ | अब भी | even now |
| कछु | कुछ | some |
| संसउ | संशय | doubt |
| मन | मन में | in the mind |
| मोरे | मेरे | my |
| करहु | कीजिए | please show |
| कृपा | कृपा | kindness |
| बिनवउँ | मैं विनती करती हूँ | I beseech you |
| कर | हाथ | hands |
| जोरें | जोड़े हुए | folded together |
2 प्रभु तब मोहि बहु भाँति प्रबोधा। नाथ सो समुझि करहु जनि क्रोधा।।
English explanation
Lord, you instructed me in many ways then; my lord, recalling that, please do not be angry.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| तब | उस समय | at that time |
| मोहि | मुझे | me |
| बहु | अनेक | many |
| भाँति | प्रकार से | in ways |
| प्रबोधा | समझाया था | instructed |
| नाथ | हे स्वामी | O lord |
| सो | उस बात को | that matter |
| समुझि | समझकर; ध्यान में रखकर | considering; recalling |
| करहु | कीजिए | do |
| जनि | मत | not |
| क्रोधा | क्रोध | be angry |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.109
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 123
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 122, 123
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