बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तपबल संभु करहिं संघारा। तप तें अगम न कछु संसारा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतपहीके बलसे रुद्र संहार करते हैं। संसारमें कोई ऐसी वस्तु नहीं जो तपसे न मिल सके। यह सुनकर राजाको बड़ा अनुराग हुआ। तब वह (तपस्वी) पुरानी कथाएँ कहने लगा॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 167 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तपबल संभु करहिं संघारा। तप तें अगम न कछु संसारा।।
भयउ नृपहि सुनि अति अनुरागा। कथा पुरातन कहै सो लागा।।
स्रोत अभिलेख 1.163 · पुस्तक पृ. 167, 168
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तपबल संभु करहिं संघारा। तप तें अगम न कछु संसारा।।
English explanation
Through the power of austerity, Shiva brings about dissolution. Nothing in the world is beyond attainment through austerity.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तपबल | तपस्या के बल से | through the power of austerity |
| संभु | शंभु, शिव | Shiva |
| करहिं | करते हैं | performs |
| संघारा | संहार | dissolution |
| तप | तपस्या | austerity |
| तें | से | through |
| अगम | अप्राप्य | unattainable |
| न | नहीं | not |
| कछु | कुछ भी | anything |
| संसारा | संसार में | in the world |
2 भयउ नृपहि सुनि अति अनुरागा। कथा पुरातन कहै सो लागा।।
English explanation
Hearing this, the king felt great affection. The ascetic began recounting ancient tales.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भयउ | हुआ | arose |
| नृपहि | राजा को | in the king; to the king |
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| अति | बहुत | great |
| अनुरागा | अनुराग; स्नेह | affection |
| कथा | कथा | tales |
| पुरातन | पुरानी | ancient |
| कहै | कहने | to recount |
| सो | वह तपस्वी | he, the ascetic |
| लागा | लगा | began |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.163
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 167
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 167, 168
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।