बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जनि आचरुज करहु मन माहीं। सुत तप तें दुर्लभ कछु नाहीं।।
मूल पाठ
जनि आचरुज करहु मन माहीं। सुत तप तें दुर्लभ कछु नाहीं।।
तपबल तें जग सृजइ बिधाता। तपबल बिष्नु भए परित्राता।।
स्रोत अभिलेख 1.163 · पुस्तक पृ. 167, 168
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे पुत्र! मनमें आश्चर्य मत करो, तपसे कुछ भी दुर्लभ नहीं है, तपके बलसे ब्रह्मा जगत्को रचते हैं। तपहीके बलसे विष्णु संसारका पालन करनेवाले बने हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 167 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जनि आचरुज करहु मन माहीं। सुत तप तें दुर्लभ कछु नाहीं।।
English explanation
AI draft: Do not be astonished in your heart. Son, nothing is unattainable through austerity.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनि | मत | do not |
| आचरुज | आश्चर्य | astonishment |
| करहु | करो | feel; do |
| मन | मन | heart; mind |
| माहीं | में | within |
| सुत | हे पुत्र | O son |
| तप | तपस्या | austerity |
| तें | से; के द्वारा | through; by |
| दुर्लभ | दुर्लभ; प्राप्त करना कठिन | hard to attain |
| कछु | कुछ भी | anything |
| नाहीं | नहीं है | is not |
2 तपबल तें जग सृजइ बिधाता। तपबल बिष्नु भए परित्राता।।
English explanation
Through the power of austerity, Brahma creates the world; through that power, Vishnu became its protector.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तपबल | तपस्या के बल | the power of austerity |
| तें | से | through |
| जग | जगत | the world |
| सृजइ | सृजन करते हैं | creates |
| बिधाता | सृष्टिकर्ता ब्रह्मा | Brahma, the creator |
| तपबल | तपस्या के बल से | through the power of austerity |
| बिष्नु | विष्णु, जगत के पालक | Vishnu, the world's preserver |
| भए | हुए | became |
| परित्राता | रक्षक | protector |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.163
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 167
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 167, 168
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।