बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
करम धरम इतिहास अनेका। करइ निरूपन बिरति बिबेका।।
मूल पाठ
करम धरम इतिहास अनेका। करइ निरूपन बिरति बिबेका।।
उदभव पालन प्रलय कहानी। कहेसि अमित आचरज बखानी।।
स्रोत अभिलेख 1.163 · पुस्तक पृ. 167, 168
भावार्थ
मूल पाठ के बादकर्म, धर्म और अनेकों प्रकारके इतिहास कहकर वह वैराग्य और ज्ञानका निरूपण करने लगा। सृष्टिकी उत्पत्ति, पालन (स्थिति) और संहार (प्रलय) की अपार आश्चर्यभरी कथाएँ उसने विस्तारसे कहीं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 167 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 करम धरम इतिहास अनेका। करइ निरूपन बिरति बिबेका।।
English explanation
He recounts many traditional accounts concerning deeds and duty, and explains dispassion and discernment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करम | कर्म; आचरण | deeds; conduct |
| धरम | धर्म; कर्तव्य | righteous duty |
| इतिहास | अतीत की कथाएँ | traditional accounts of the past |
| अनेका | अनेक | many |
| करइ | करता है | does |
| निरूपन | व्याख्या; विवेचन | exposition |
| बिरति | वैराग्य | dispassion |
| बिबेका | विवेक | discernment |
2 उदभव पालन प्रलय कहानी। कहेसि अमित आचरज बखानी।।
English explanation
He told stories of creation, preservation, and dissolution, describing countless wonders.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उदभव | उत्पत्ति | origination; creation |
| पालन | पालन | preservation |
| प्रलय | सृष्टि का लय | cosmic dissolution |
| कहानी | कथाएँ | stories |
| कहेसि | उसने कहा | he told |
| अमित | असंख्य | countless |
| आचरज | आश्चर्य | wonders |
| बखानी | वर्णन करके | describing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.163
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 167
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 167, 168
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।