बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौ छबि सुधा पयोनिधि होई। परम रूपमय कच्छप सोई।।
मूल पाठ
जौ छबि सुधा पयोनिधि होई। परम रूपमय कच्छप सोई।।
सोभा रजु मंदरु सिंगारू। मथै पानि पंकज निज मारू।।
स्रोत अभिलेख 1.247 · पुस्तक पृ. 240, 241
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[जिन लक्ष्मीजीकी बात ऊपर कही गयी है वे निकली थीं खारे समुद्रसे, जिसको मथनेके लिये भगवान्ने अति कर्कश पीठवाले कच्छपका रूप धारण किया, रस्सी बनायी गयी महान् विषधर वासुकि नागकी, मथानीका कार्य किया अतिशय कठोर मन्दराचल पर्वतने और उसे मथा सारे देवताओं और दैत्योंने मिलकर। जिन लक्ष्मीको अतिशय शोभाकी खान और अनुपम सुन्दरी कहते हैं, उनको प्रकट करनेमें हेतु बने ये सब असुन्दर एवं स्वाभाविक ही कठोर उपकरण। ऐसे उपकरणोंसे प्रकट हुई लक्ष्मी श्रीजानकीजीकी समताको कैसे पा सकती हैं। हाँ, इसके विपरीत] यदि छबिरूपी अमृतका समुद्र हो, परम रूपमय कच्छप हो, शोभारूप रस्सी हो, शृंगार [रस] पर्वत हो और [उस छबिके समुद्रको] स्वयं कामदेव अपने ही करकमलसे मथे,॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 241 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जौ छबि सुधा पयोनिधि होई। परम रूपमय कच्छप सोई।।
English explanation
If there were an ocean of the nectar of loveliness, and supreme beauty itself became the tortoise—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौ | यदि | if |
| छबि | छवि; सुंदरता | loveliness |
| सुधा | अमृत | nectar |
| पयोनिधि | समुद्र | ocean |
| होई | हो; बन जाए | were; became |
| परम | सर्वोच्च | supreme |
| रूपमय | सौंदर्य से पूर्ण | embodying beauty |
| कच्छप | कछुआ; मंथन का आधार | tortoise supporting the churning |
| सोई | वही | that very one |
2 सोभा रजु मंदरु सिंगारू। मथै पानि पंकज निज मारू।।
English explanation
If splendor became the rope, adornment the Mandara mountain, and the god of love churned with his own lotus-like hands—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोभा | शोभा | splendor |
| रजु | रस्सी | rope |
| मंदरु | मंदर पर्वत; मंथन की मथानी | Mount Mandara, the churning rod |
| सिंगारू | शृंगार; सौंदर्य-सज्जा | adornment |
| मथै | मंथन करें | churned |
| पानि | हाथों से | with hands |
| पंकज | कमल जैसे | lotus-like |
| निज | अपने | his own |
| मारू | कामदेव | the god of love |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.247
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 241
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणसहित विश्वामित्रका यज्ञशालामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 240, 241
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