बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गिरा मुखर तन अरध भवानी। रति अति दुखित अतनु पति जानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[पृथ्वीकी स्त्रियोंकी तो बात ही क्या, देवताओंकी स्त्रियोंको भी यदि देखा जाय तो हमारी अपेक्षा कहीं अधिक दिव्य और सुन्दर हैं, तो उनमें ] सरस्वती तो बहुत बोलनेवाली हैं; पार्वती अद्र्धंागिनी हैं (अर्थात् अद्र्ध-नारीनटेश्वरके रूपमें उनका आधा ही अंग स्त्रीका है, शेष आधा अंग पुरुष—शिवजीका है), कामदेवकी स्त्री रति पतिको बिना शरीरका (अनंग) जानकर बहुत दुखी रहती है और जिनके विष और मद्य-जैसे [समुद्रसे उत्पन्न होनेके नाते] प्रिय भाई हैं, उन लक्ष्मीके समान तो जानकीजीको कहा ही कैसे जाय॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 240 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
गिरा मुखर तन अरध भवानी। रति अति दुखित अतनु पति जानी।।
बिष बारुनी बंधु प्रिय जेही। कहिअ रमासम किमि बैदेही।।
स्रोत अभिलेख 1.247 · पुस्तक पृ. 240, 241
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 गिरा मुखर तन अरध भवानी। रति अति दुखित अतनु पति जानी।।
English explanation
Saraswati is loquacious; Bhavani has half a body. Rati is deeply distressed, knowing her husband to be bodiless.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गिरा | वाणी की देवी सरस्वती | Saraswati, goddess of speech |
| मुखर | अधिक बोलने वाली | loquacious |
| तन | शरीर | body |
| अरध | आधा | half |
| भवानी | पार्वती | Parvati |
| रति | कामदेव की पत्नी रति | Rati, wife of the god of love |
| अति | अत्यंत | extremely |
| दुखित | दुखी | distressed |
| अतनु | शरीरहीन | bodiless |
| पति | पति को | her husband |
| जानी | जानकर | knowing |
2 बिष बारुनी बंधु प्रिय जेही। कहिअ रमासम किमि बैदेही।।
English explanation
How could Sita be called equal to Lakshmi, whose dear kin are poison and wine?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिष | विष | poison |
| बारुनी | मदिरा | wine; intoxicating liquor |
| बंधु | बंधु; सगे | kin |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| जेही | जिनको; जिन लक्ष्मी को | to whom; to Lakshmi |
| कहिअ | कहा जाए | could be called |
| रमासम | लक्ष्मी के समान | equal to Lakshmi |
| किमि | कैसे | how |
| बैदेही | विदेह की राजकुमारी सीता | Sita, princess of Videha |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.247
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 240
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मणसहित विश्वामित्रका यज्ञशालामें प्रवेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 240, 241
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।