बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौं बरषइ बर बारि बिचारू। होहिं कबित मुकुतामनि चारू।।
मूल पाठ
जौं बरषइ बर बारि बिचारू। होहिं कबित मुकुतामनि चारू।।
स्रोत अभिलेख 1.11 · पुस्तक पृ. 32, 32
भावार्थ
मूल पाठ के बादइसमें यदि श्रेष्ठ विचाररूपी जल बरसता है तो मुक्तामणिके समान सुन्दर कविता होती है॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 32 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जौं बरषइ बर बारि बिचारू। होहिं कबित मुकुतामनि चारू।।
English explanation
If the excellent water of thoughtful reflection rains down, beautiful pearls of poetry are formed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| बरषइ | बरसता है | rains down |
| बर | उत्तम | excellent |
| बारि | जल | water |
| बिचारू | विचार रूपी | in the form of reflection |
| होहिं | बनते हैं | are formed |
| कबित | कविता रूपी | in the form of poems |
| मुकुतामनि | मोती; मोतीरूपी रत्न | pearls; pearl gems |
| चारू | सुंदर | beautiful |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 32
- सहायक विषय
- तुलसीदासजीकी दीनता और रामभक्तिमयी कविताकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 32, 32
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।