बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौं घरु बरु कुलु होइ अनूपा। करिअ बिबाहु सुता अनुरुपा।।
मूल पाठ
जौं घरु बरु कुलु होइ अनूपा। करिअ बिबाहु सुता अनुरुपा।।
न त कन्या बरु रहउ कुआरी। कंत उमा मम प्रानपिआरी।।
स्रोत अभिलेख 1.71 · पुस्तक पृ. 88, 89
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो हमारी कन्याके अनुकूल घर, वर और कुल उत्तम हो तो विवाह कीजिये। नहीं तो लड़की चाहे कुमारी ही रहे (मैं अयोग्य वरके साथ उसका विवाह नहीं करना चाहती); क्योंकि हे स्वामिन्! पार्वती मुझको प्राणोंके समान प्यारी है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 88 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जौं घरु बरु कुलु होइ अनूपा। करिअ बिबाहु सुता अनुरुपा।।
English explanation
If the household, bridegroom, and lineage are excellent and suitable for our daughter, arrange the marriage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| घरु | घर-परिवार | household |
| बरु | दूल्हा | bridegroom |
| कुलु | वंश | lineage |
| होइ | हों | are |
| अनूपा | अत्युत्तम | excellent |
| करिअ | कीजिए | please arrange |
| बिबाहु | विवाह | marriage |
| सुता | बेटी के | for our daughter |
| अनुरुपा | अनुरूप | suitable |
2 न त कन्या बरु रहउ कुआरी। कंत उमा मम प्रानपिआरी।।
English explanation
Otherwise, it is better that the girl remain unmarried. Dear husband, Uma is as dear to me as my life.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| न | नहीं | not |
| त | तो | then |
| कन्या | बेटी | the daughter |
| बरु | बल्कि बेहतर है कि | it is better that |
| रहउ | रहे | let her remain |
| कुआरी | अविवाहित | unmarried |
| कंत | हे प्रिय पति | dear husband |
| उमा | उमा, पार्वती | Uma, Parvati |
| मम | मेरी | my |
| प्रानपिआरी | प्राणों जैसी प्यारी | dear as life itself |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.71
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 88
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 88, 89
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।