बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौं न मिलहि बरु गिरिजहि जोगू। गिरि जड़ सहज कहिहि सबु लोगू।।
मूल पाठ
जौं न मिलहि बरु गिरिजहि जोगू। गिरि जड़ सहज कहिहि सबु लोगू।।
सोइ बिचारि पति करेहु बिबाहू। जेहिं न बहोरि होइ उर दाहू।।
स्रोत अभिलेख 1.71 · पुस्तक पृ. 88, 89
भावार्थ
मूल पाठ के बादयदि पार्वतीके योग्य वर न मिला तो सब लोग कहेंगे कि पर्वत स्वभावसे ही जड (मूर्ख) होते हैं। हे स्वामी! इस बातको विचारकर ही विवाह कीजियेगा, जिसमें फिर पीछे हृदयमें सन्ताप न हो॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 88 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जौं न मिलहि बरु गिरिजहि जोगू। गिरि जड़ सहज कहिहि सबु लोगू।।
English explanation
If Girija does not find a suitable bridegroom, everyone will say that the mountain king is naturally unthinking.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| न | नहीं | not |
| मिलहि | मिले | is found |
| बरु | दूल्हा | bridegroom |
| गिरिजहि | गिरिजा अर्थात पार्वती को | for Girija, Parvati |
| जोगू | योग्य | suitable |
| गिरि | पर्वतराज हिमवान | Himavan, the mountain king |
| जड़ | विवेकहीन | unthinking |
| सहज | स्वभाव से | by nature |
| कहिहि | कहेंगे | will say |
| सबु | सभी | all |
| लोगू | लोग | people |
2 सोइ बिचारि पति करेहु बिबाहू। जेहिं न बहोरि होइ उर दाहू।।
English explanation
Husband, consider that and arrange the marriage so that there is no anguish in the heart afterward.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | उसी बात को | that very matter |
| बिचारि | विचार करके | having considered |
| पति | हे पति | husband |
| करेहु | कीजिए | please arrange |
| बिबाहू | विवाह | the marriage |
| जेहिं | जिससे | so that |
| न | नहीं | not |
| बहोरि | बाद में | afterward |
| होइ | हो | arise |
| उर | हृदय में | in the heart |
| दाहू | संताप | anguish |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.71
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 88
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 88, 89
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।