बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस कहि परि चरन धरि सीसा। बोले सहित सनेह गिरीसा।।
मूल पाठ
अस कहि परि चरन धरि सीसा। बोले सहित सनेह गिरीसा।।
बरु पावक प्रगटै ससि माहीं। नारद बचनु अन्यथा नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.71 · पुस्तक पृ. 88, 89
भावार्थ
मूल पाठ के बादइस प्रकार कहकर मैना पतिके चरणोंपर मस्तक रखकर गिर पड़ीं। तब हिमवान्ने प्रेमसे कहा—चाहे चन्द्रमामें अग्नि प्रकट हो जाय, पर नारदजीके वचन झूठे नहीं हो सकते॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 89 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अस कहि परि चरन धरि सीसा। बोले सहित सनेह गिरीसा।।
English explanation
Saying this, Maina fell at her husband’s feet and placed her head there. The mountain king spoke affectionately.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | this |
| कहि | कहकर | having said |
| परि | गिरकर | falling down |
| चरन | चरणों में | at his feet |
| धरि | रखकर | placing |
| सीसा | सिर | her head |
| बोले | बोले | spoke |
| सहित | साथ | with |
| सनेह | स्नेह | affection |
| गिरीसा | पर्वतराज हिमवान | Himavan, the mountain king |
2 बरु पावक प्रगटै ससि माहीं। नारद बचनु अन्यथा नाहीं।।
English explanation
Even if fire should appear in the moon, Narada’s words cannot prove false.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बरु | भले ही | even if |
| पावक | आग | fire |
| प्रगटै | प्रकट हो जाए | should appear |
| ससि | चंद्रमा | the moon |
| माहीं | में | in |
| नारद | नारद मुनि का | sage Narada’s |
| बचनु | वचन | word |
| अन्यथा | असत्य | false |
| नाहीं | नहीं है | is not |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.71
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 89
- सहायक विषय
- पार्वतीका जन्म और तपस्या
- मुद्रित पृष्ठ
- 88, 89
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।