बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जौं अनाथ हित हम पर नेहू। तौ प्रसन्न होइ यह बर देहू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे अनाथोंका कल्याण करनेवाले! यदि हमलोगोंपर आपका स्नेह है, तो प्रसन्न होकर यह वर दीजिये कि आपका जो स्वरूप शिवजीके मनमें बसता है और जिस [की प्राप्ति] के लिये मुनिलोग यत्न करते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 153 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जौं अनाथ हित हम पर नेहू। तौ प्रसन्न होइ यह बर देहू।।
जो सरूप बस सिव मन माहीं। जेहि कारन मुनि जतन कराहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.146 · पुस्तक पृ. 153, 154
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जौं अनाथ हित हम पर नेहू। तौ प्रसन्न होइ यह बर देहू।।
English explanation
O benefactor of the helpless, if you have affection for us, then graciously grant us this boon.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| अनाथ | असहायों के | of the helpless |
| हित | हितकारी | benefactor |
| हम | हम | us |
| पर | पर | toward |
| नेहू | स्नेह | affection |
| तौ | तो | then |
| प्रसन्न | प्रसन्न | pleased |
| होइ | होकर | being |
| यह | यह | this |
| बर | वरदान | boon |
| देहू | दीजिए | please grant |
2 जो सरूप बस सिव मन माहीं। जेहि कारन मुनि जतन कराहीं।।
English explanation
That form which dwells in Shiva’s mind, and for which sages strive—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो | which |
| सरूप | स्वरूप | form |
| बस | बसता है | dwells |
| सिव | शिव के | Shiva’s |
| मन | मन | mind |
| माहीं | में | in |
| जेहि | जिसके | which |
| कारन | लिए | for |
| मुनि | मुनि | sages |
| जतन | साधना का प्रयास | spiritual efforts |
| कराहीं | करते हैं | undertake |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.146
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 153
- सहायक विषय
- मनु-शतरूपा-तप एवं वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 153, 154
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।