बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनु सेवक सुरतरु सुरधेनु। बिधि हरि हर बंदित पद रेनू।।
मूल पाठ
सुनु सेवक सुरतरु सुरधेनु। बिधि हरि हर बंदित पद रेनू।।
सेवत सुलभ सकल सुख दायक। प्रनतपाल सचराचर नायक।।
स्रोत अभिलेख 1.146 · पुस्तक पृ. 153, 154
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे प्रभो! सुनिये, आप सेवकोंके लिये कल्पवृक्ष और कामधेनु हैं। आपकी चरण-रजकी ब्रह्मा, विष्णु और शिवजी भी वन्दना करते हैं। आप सेवा करनेमें सुलभ हैं तथा सब सुखोंके देनेवाले हैं। आप शरणागतके रक्षक और जड-चेतनके स्वामी हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 153 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनु सेवक सुरतरु सुरधेनु। बिधि हरि हर बंदित पद रेनू।।
English explanation
AI draft: Hear us: you are a wish-fulfilling tree and cow to your servants; Brahma, Vishnu, and Shiva revere the dust of your feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनिए | please listen |
| सेवक | सेवकों के लिए | for your servants |
| सुरतरु | कल्पवृक्ष | the heavenly wish-fulfilling tree |
| सुरधेनु | कामधेनु | the heavenly wish-fulfilling cow |
| बिधि | ब्रह्मा | Brahma, the creator |
| हरि | विष्णु | Vishnu |
| हर | शिव | Shiva |
| बंदित | वंदित | revered by |
| पद | चरणों की | of your feet |
| रेनू | धूल | dust |
2 सेवत सुलभ सकल सुख दायक। प्रनतपाल सचराचर नायक।।
English explanation
You are readily accessible through service, the giver of all happiness, protector of those who seek refuge, and lord of all that moves and is still.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सेवत | सेवा करने पर | when served devotedly |
| सुलभ | सहज उपलब्ध | readily accessible |
| सकल | समस्त | all |
| सुख | सुख | happiness |
| दायक | देने वाले | giver of |
| प्रनतपाल | शरणागतों के पालक | protector of those seeking refuge |
| सचराचर | समस्त चर और अचर जगत के | of the entire moving and unmoving world |
| नायक | स्वामी | lord |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.146
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 153
- सहायक विषय
- मनु-शतरूपा-तप एवं वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 153, 154
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।