बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जो भुसुंडि मन मानस हंसा। सगुन अगुन जेहि निगम प्रसंसा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजो काकभुशुण्डिके मनरूपी मानसरोवरमें विहार करनेवाला हंस है, सगुण और निर्गुण कहकर वेद जिसकी प्रशंसा करते हैं, हे शरणागतके दु:ख मिटानेवाले प्रभो! ऐसी कृपा कीजिये कि हम उसी रूपको नेत्र भरकर देखें॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 153 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जो भुसुंडि मन मानस हंसा। सगुन अगुन जेहि निगम प्रसंसा।।
देखहिं हम सो रूप भरि लोचन। कृपा करहु प्रनतारति मोचन।।
स्रोत अभिलेख 1.146 · पुस्तक पृ. 153, 154
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जो भुसुंडि मन मानस हंसा। सगुन अगुन जेहि निगम प्रसंसा।।
English explanation
Who is the swan in the lake of Kakabhushundi’s mind, whom the Vedas praise as both endowed with attributes and beyond attributes—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो | who |
| भुसुंडि | काकभुशुंडि के | of Kakabhushundi, the crow-sage |
| मन | मनरूपी | in the form of the mind |
| मानस | मानसरोवर | Lake Manasa |
| हंसा | हंस | swan |
| सगुन | गुणों सहित | with attributes |
| अगुन | गुणों से परे | beyond attributes |
| जेहि | जिसकी | whom |
| निगम | वेद | the Vedas |
| प्रसंसा | प्रशंसा करते हैं | praise |
2 देखहिं हम सो रूप भरि लोचन। कृपा करहु प्रनतारति मोचन।।
English explanation
May we behold that very form to our eyes’ content; show us grace, O remover of the distress of those who seek refuge.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखहिं | देखें | may behold |
| हम | हम | we |
| सो | वही | that very |
| रूप | रूप | form |
| भरि | भरकर | to the full |
| लोचन | आँखें | our eyes |
| कृपा | कृपा | grace |
| करहु | कीजिए | please bestow |
| प्रनतारति | शरणागतों की पीड़ा | the distress of those seeking refuge |
| मोचन | हरने वाले | O remover of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.146
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 153
- सहायक विषय
- मनु-शतरूपा-तप एवं वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 153, 154
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।