बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जे सुनि सादर नर बड़भागी। भव तरिहहिं ममता मद त्यागी।।
मूल पाठ
जे सुनि सादर नर बड़भागी। भव तरिहहिं ममता मद त्यागी।।
आदिसक्ति जेहिं जग उपजाया। सोउ अवतरिहि मोरि यह माया।।
स्रोत अभिलेख 1.152 · पुस्तक पृ. 158, 159
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिन (चरित्रों) को बड़े भाग्यशाली मनुष्य आदरसहित सुनकर, ममता और मद त्यागकर, भवसागरसे तर जायँगे। आदिशक्ति यह मेरी [स्वरूपभूता] माया भी, जिसने जगत्को उत्पन्न किया है, अवतार लेगी॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 158 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जे सुनि सादर नर बड़भागी। भव तरिहहिं ममता मद त्यागी।।
English explanation
Hearing those deeds with reverence, fortunate people will relinquish possessive attachment and pride and cross beyond worldly existence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जिन चरित्रों को | which deeds |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सादर | आदरपूर्वक | with reverence |
| नर | मनुष्य | people |
| बड़भागी | अत्यंत भाग्यशाली | highly fortunate |
| भव | संसार; जन्म-मरण का बंधन | worldly existence; the cycle of birth and death |
| तरिहहिं | पार हो जाएँगे | will cross beyond |
| ममता | मेरा-पन; आसक्ति | possessive attachment |
| मद | अहंकार | pride |
| त्यागी | त्यागकर | relinquishing |
2 आदिसक्ति जेहिं जग उपजाया। सोउ अवतरिहि मोरि यह माया।।
English explanation
The primordial power that brought forth the world—this power of mine, Maya—will also incarnate.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आदिसक्ति | आदि शक्ति; मूल सृजनशक्ति | primordial creative power |
| जेहिं | जिसने | who; by whom |
| जग | जगत | the world |
| उपजाया | उत्पन्न किया | brought forth |
| सोउ | वह भी | that same power also |
| अवतरिहि | अवतार लेगी | will incarnate |
| मोरि | मेरी | my |
| यह | यह | this |
| माया | माया; मेरी सृजनशक्ति | Maya; my creative power |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.152
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 158
- सहायक विषय
- मनु-शतरूपा-तप एवं वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 158, 159
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।