बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुरउब मैं अभिलाष तुम्हारा। सत्य सत्य पन सत्य हमारा।।
मूल पाठ
पुरउब मैं अभिलाष तुम्हारा। सत्य सत्य पन सत्य हमारा।।
पुनि पुनि अस कहि कृपानिधाना। अंतरधान भए भगवाना।।
स्रोत अभिलेख 1.152 · पुस्तक पृ. 158, 159
भावार्थ
मूल पाठ के बादइस प्रकार मैं तुम्हारी अभिलाषा पूरी करूँगा। मेरा प्रण सत्य है, सत्य है, सत्य है। कृपानिधान भगवान् बार-बार ऐसा कहकर अन्तर्धान हो गये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 158 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 पुरउब मैं अभिलाष तुम्हारा। सत्य सत्य पन सत्य हमारा।।
English explanation
I shall fulfill your wish. Truly, truly—my pledge is true.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुरउब | पूरा करूँगा | shall fulfill |
| मैं | मैं | I |
| अभिलाष | इच्छा | wish |
| तुम्हारा | तुम्हारी | your |
| सत्य | सत्य; सचमुच | truly |
| सत्य | सत्य; निश्चय ही | truly; certainly |
| पन | प्रण; प्रतिज्ञा | pledge; promise |
| सत्य | सच्चा | true |
| हमारा | हमारा; मेरा | my |
2 पुनि पुनि अस कहि कृपानिधाना। अंतरधान भए भगवाना।।
English explanation
Having said this repeatedly, the Lord, the treasure of compassion, disappeared from sight.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | again |
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| कृपानिधाना | कृपा के भंडार | treasure of compassion |
| अंतरधान | दृष्टि से ओझल | hidden from sight |
| भए | हो गए | became |
| भगवाना | भगवान | the Lord |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.152
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 158
- सहायक विषय
- मनु-शतरूपा-तप एवं वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 158, 159
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।