बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जेहि बिधि सुखी होहिं पुर लोगा। करहिं कृपानिधि सोइ संजोगा।।
मूल पाठ
जेहि बिधि सुखी होहिं पुर लोगा। करहिं कृपानिधि सोइ संजोगा।।
बेद पुरान सुनहिं मन लाई। आपु कहहिं अनुजन्ह समुझाई।।
स्रोत अभिलेख 1.205 · पुस्तक पृ. 203, 204
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिस प्रकार नगरके लोग सुखी हों, कृपानिधान श्रीरामचन्द्रजी वही संयोग (लीला) करते हैं। वे मन लगाकर वेद-पुराण सुनते हैं और फिर स्वयं छोटे भाइयोंको समझाकर कहते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 204 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जेहि बिधि सुखी होहिं पुर लोगा। करहिं कृपानिधि सोइ संजोगा।।
English explanation
Rama, the treasury of compassion, makes whatever arrangements will keep the townspeople happy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहि | जिस | in whichever |
| बिधि | रीति से | way |
| सुखी | सुखी | happy |
| होहिं | हों | may be |
| पुर | नगर के | of the town |
| लोगा | लोग | people |
| करहिं | करते हैं | makes |
| कृपानिधि | कृपा के भंडार राम | Rama, the treasury of compassion |
| सोइ | वही | that very |
| संजोगा | व्यवस्था | arrangement |
2 बेद पुरान सुनहिं मन लाई। आपु कहहिं अनुजन्ह समुझाई।।
English explanation
Rama listens attentively to the Vedas and Puranas and himself explains them to his younger brothers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बेद | वेद | the Vedas |
| पुरान | पुराण | the Puranas |
| सुनहिं | सुनते हैं | listens to |
| मन | मन | attention |
| लाई | लगाकर | having focused |
| आपु | स्वयं | himself |
| कहहिं | बताते हैं | relates |
| अनुजन्ह | छोटे भाइयों को | to his younger brothers |
| समुझाई | समझाकर | explaining |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.205
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 204
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 203, 204
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।