बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रातकाल उठि कै रघुनाथा। मातु पिता गुरु नावहिं माथा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरघुनाथजी प्रात:काल उठकर माता-पिता और गुरुको मस्तक नवाते हैं और आज्ञा लेकर नगरका काम करते हैं। उनके चरित्र देख-देखकर राजा मनमें बड़े हॢषत होते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 204 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
प्रातकाल उठि कै रघुनाथा। मातु पिता गुरु नावहिं माथा।।
आयसु मागि करहिं पुर काजा। देखि चरित हरषइ मन राजा।।
स्रोत अभिलेख 1.205 · पुस्तक पृ. 203, 204
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 प्रातकाल उठि कै रघुनाथा। मातु पिता गुरु नावहिं माथा।।
English explanation
Rama, lord of the Raghu lineage, rises in the morning and bows his head before his mother, father, and teacher.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रातकाल | सुबह | in the morning |
| उठि | उठ | rising |
| कै | कर | having done so |
| रघुनाथा | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of the Raghu lineage |
| मातु | माता के आगे | before his mother |
| पिता | पिता के आगे | before his father |
| गुरु | गुरु के आगे | before his teacher |
| नावहिं | झुकाते हैं | bows |
| माथा | सिर | his head |
2 आयसु मागि करहिं पुर काजा। देखि चरित हरषइ मन राजा।।
English explanation
Rama asks permission and attends to the town's affairs. Seeing his conduct, King Dasharatha rejoices inwardly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आयसु | आज्ञा या अनुमति | permission |
| मागि | माँगकर | having asked for |
| करहिं | करते हैं | carries out |
| पुर | नगर के | of the town |
| काजा | कार्य | tasks |
| देखि | देखकर | seeing |
| चरित | आचरण | his conduct |
| हरषइ | प्रसन्न होता है | rejoices |
| मन | मन | the heart |
| राजा | राजा दशरथ का | of King Dasharatha |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.205
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 204
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 203, 204
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।