बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जेहि पर कृपा न करहिं पुरारी। सो न पाव मुनि भगति हमारी।।
मूल पाठ
जेहि पर कृपा न करहिं पुरारी। सो न पाव मुनि भगति हमारी।।
अस उर धरि महि बिचरहु जाई। अब न तुम्हहि माया निअराई।।
स्रोत अभिलेख 1.138 · पुस्तक पृ. 147, 147
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे मुनि! पुरारि (शिवजी) जिसपर कृपा नहीं करते, वह मेरी भक्ति नहीं पाता। हृदयमें ऐसा निश्चय करके जाकर पृथ्वीपर विचरो। अब मेरी माया तुम्हारे निकट नहीं आवेगी॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 147 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जेहि पर कृपा न करहिं पुरारी। सो न पाव मुनि भगति हमारी।।
English explanation
“O sage, whoever does not receive Shiva’s grace does not attain devotion to me.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहि | जिस पर | whomever |
| पर | पर | upon |
| कृपा | कृपा | grace |
| न | नहीं | not |
| करहिं | करते हैं | bestows |
| पुरारी | त्रिपुर के शत्रु शिव | Shiva, destroyer of Tripura |
| सो | वह | that person |
| न | नहीं | not |
| पाव | पाता | attains |
| मुनि | हे मुनि | O sage |
| भगति | भक्ति | devotion |
| हमारी | मेरे प्रति | to me |
2 अस उर धरि महि बिचरहु जाई। अब न तुम्हहि माया निअराई।।
English explanation
“Keep this in your heart, go, and wander the earth. Illusion will no longer come near you.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | यह बात | this understanding |
| उर | हृदय में | in the heart |
| धरि | धारण करके | keeping |
| महि | पृथ्वी पर | on earth |
| बिचरहु | विचरण करो | wander |
| जाई | जाकर | having gone |
| अब | अब | now |
| न | नहीं | not |
| तुम्हहि | तुम्हारे पास | near you |
| माया | माया | illusion |
| निअराई | निकट आएगी | will approach |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.138
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 147
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 147, 147
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