बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जपहु जाइ संकर सत नामा। होइहि हृदयँ तुरंत बिश्रामा।।
मूल पाठ
जपहु जाइ संकर सत नामा। होइहि हृदयँ तुरंत बिश्रामा।।
कोउ नहिं सिव समान प्रिय मोरें। असि परतीति तजहु जनि भोरें।।
स्रोत अभिलेख 1.138 · पुस्तक पृ. 147, 147
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[भगवान्ने कहा—] जाकर शङ्करजीके शतनामका जप करो, इससे हृदयमें तुरंत शान्ति होगी। शिवजीके समान मुझे कोई प्रिय नहीं है, इस विश्वासको भूलकर भी न छोडऩा॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 147 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जपहु जाइ संकर सत नामा। होइहि हृदयँ तुरंत बिश्रामा।।
English explanation
“Go and repeat Shiva’s hundred names; your heart will immediately find peace.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जपहु | जप करो | repeat devotionally |
| जाइ | जाकर | having gone |
| संकर | भगवान शिव के | of Lord Shiva |
| सत | सौ | one hundred |
| नामा | नाम | names |
| होइहि | होगा | will arise |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| तुरंत | तुरंत | immediately |
| बिश्रामा | शांति | peace |
2 कोउ नहिं सिव समान प्रिय मोरें। असि परतीति तजहु जनि भोरें।।
English explanation
“No one is as dear to me as Shiva. Never abandon this conviction, even inadvertently.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोउ | कोई | anyone |
| नहिं | नहीं | not |
| सिव | भगवान शिव | Lord Shiva |
| समान | के बराबर | as much as |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| मोरें | मुझे | to me |
| असि | ऐसा | such |
| परतीति | विश्वास | conviction |
| तजहु | छोड़ो | abandon |
| जनि | मत | do not |
| भोरें | भूलकर भी | even inadvertently |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.138
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 147
- सहायक विषय
- विश्वमोहिनीका स्वयंवर, शिवगणोंको तथा भगवान्को शाप और नारदका मोह-भंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 147, 147
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।