बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जानि प्रिया आदरु अति कीन्हा। बाम भाग आसनु हर दीन्हा।।
मूल पाठ
जानि प्रिया आदरु अति कीन्हा। बाम भाग आसनु हर दीन्हा।।
बैठीं सिव समीप हरषाई। पूरुब जन्म कथा चित आई।।
स्रोत अभिलेख 1.107 · पुस्तक पृ. 121, 121
भावार्थ
मूल पाठ के बादअपनी प्यारी पत्नी जानकर शिवजीने उनका बहुत आदर-सत्कार किया और अपनी बायीं ओर बैठनेके लिये आसन दिया। पार्वतीजी प्रसन्न होकर शिवजीके पास बैठ गयीं। उन्हें पिछले जन्मकी कथा स्मरण हो आयी॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 121 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जानि प्रिया आदरु अति कीन्हा। बाम भाग आसनु हर दीन्हा।।
English explanation
Recognizing his beloved, Shiva honored her greatly and gave her a seat on his left.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जानि | पहचानकर | recognizing |
| प्रिया | अपनी प्रिय पत्नी को | his beloved wife |
| आदरु | सम्मान | honor |
| अति | बहुत | greatly |
| कीन्हा | किया | showed |
| बाम | बाईं | left |
| भाग | ओर | side |
| आसनु | बैठने का स्थान | a seat |
| हर | हर, शिव | Shiva |
| दीन्हा | दिया | gave |
2 बैठीं सिव समीप हरषाई। पूरुब जन्म कथा चित आई।।
English explanation
Parvati sat joyfully beside Shiva; the story of her previous birth came to mind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बैठीं | बैठीं | sat |
| सिव | शिव के | Shiva |
| समीप | पास | beside |
| हरषाई | प्रसन्न होकर | joyfully |
| पूरुब | पूर्व | previous |
| जन्म | जन्म की | birth |
| कथा | कथा | story |
| चित | मन में | to mind |
| आई | याद आई | came |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.107
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 121
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 121, 121
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