बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बैठे सोह कामरिपु कैसें। धरें सरीरु सांतरसु जैसें।।
मूल पाठ
बैठे सोह कामरिपु कैसें। धरें सरीरु सांतरसु जैसें।।
पारबती भल अवसरु जानी। गई संभु पहिं मातु भवानी।।
स्रोत अभिलेख 1.107 · पुस्तक पृ. 121, 121
भावार्थ
मूल पाठ के बादकामदेवके शत्रु शिवजी वहाँ बैठे हुए ऐसे शोभित हो रहे थे, मानो शान्तरस ही शरीर धारण किये बैठा हो। अच्छा मौका जानकर शिवपत्नी माता पार्वतीजी उनके पास गयीं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 121 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बैठे सोह कामरिपु कैसें। धरें सरीरु सांतरसु जैसें।।
English explanation
AI draft: Seated Shiva, the foe of the god of desire, shines as though the tranquil aesthetic sentiment had taken bodily form.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बैठे | बैठे हुए | seated |
| सोह | शोभित हैं | shine splendidly |
| कामरिपु | कामदेव के शत्रु शिव | Shiva, foe of the god of desire |
| कैसें | किस प्रकार—ऐसे | in what manner—thus |
| धरें | धारण किए हुए | having assumed |
| सरीरु | शरीर | a body |
| सांतरसु | शांत रस, शांति का मूर्त भाव | the tranquil aesthetic sentiment |
| जैसें | मानो | as though |
2 पारबती भल अवसरु जानी। गई संभु पहिं मातु भवानी।।
English explanation
Recognizing a favorable moment, Mother Bhavani, Parvati, went to Shiva.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पारबती | पार्वती, शिव की पत्नी | Parvati, Shiva’s wife |
| भल | अच्छा | favorable |
| अवसरु | अवसर | occasion |
| जानी | जानकर | recognizing |
| गई | गईं | went |
| संभु | शंभु, शिव | Shiva |
| पहिं | के पास | to |
| मातु | माता | Mother |
| भवानी | भवानी, पार्वती | Bhavani, Parvati |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.107
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 121
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 121, 121
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।