बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जनक पाटमहिषी जग जानी। सीय मातु किमि जाइ बखानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजनकजीकी जगद्विख्यात पटरानी और सीताजीकी माताका बखान तो हो ही कैसे सकता है। सुयश, सुकृत (पुण्य), सुख और सुन्दरता सबको बटोरकर विधाताने उन्हें सँवारकर तैयार किया है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 305 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जनक पाटमहिषी जग जानी। सीय मातु किमि जाइ बखानी।।
सुजसु सुकृत सुख सुदंरताई। सब समेटि बिधि रची बनाई।।
स्रोत अभिलेख 1.324 · पुस्तक पृ. 305, 306
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जनक पाटमहिषी जग जानी। सीय मातु किमि जाइ बखानी।।
English explanation
AI-draft meaning: Janaka’s chief queen is renowned throughout the world. How can Sita’s mother possibly be described?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनक | राजा जनक की | of King Janaka |
| पाटमहिषी | प्रधान रानी | chief queen |
| जग | संसार में | in the world |
| जानी | प्रसिद्ध हैं | is renowned |
| सीय | सीता की | of Sita |
| मातु | माता | mother |
| किमि | कैसे | how |
| जाइ | जा सकती हैं | can be |
| बखानी | वर्णित | described |
2 सुजसु सुकृत सुख सुदंरताई। सब समेटि बिधि रची बनाई।।
English explanation
Gathering together good renown, merit, happiness, and beauty, Brahma fashioned and perfected her.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुजसु | सुयश | good renown |
| सुकृत | पुण्य | virtuous merit |
| सुख | सुख | happiness |
| सुदंरताई | सुंदरता | beauty |
| सब | सबको | all of them |
| समेटि | समेटकर | gathering together |
| बिधि | ब्रह्मा ने | Brahma, the creator |
| रची | रचा | fashioned her |
| बनाई | सँवारा | perfected her form |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.324
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 305
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 305, 306
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।