बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जथा दरिद्र बिबुधतरु पाई। बहु संपति मागत सकुचाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजैसे कोई दरिद्र कल्पवृक्षको पाकर भी अधिक द्रव्य माँगनेमें संकोच करता है, क्योंकि वह उसके प्रभावको नहीं जानता, वैसे ही मेरे हृदयमें संशय हो रहा है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 156 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जथा दरिद्र बिबुधतरु पाई। बहु संपति मागत सकुचाई।।
तासु प्रभा जान नहिं सोई। तथा हृदयँ मम संसय होई।।
स्रोत अभिलेख 1.149 · पुस्तक पृ. 155, 156
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जथा दरिद्र बिबुधतरु पाई। बहु संपति मागत सकुचाई।।
English explanation
Just as a poor person, even after finding the wish-fulfilling tree, hesitates to ask for great wealth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जथा | जैसे | just as |
| दरिद्र | गरीब व्यक्ति | a poor person |
| बिबुधतरु | देवताओं का कल्पवृक्ष | the gods’ wish-fulfilling tree |
| पाई | पाकर | having found |
| बहु | बहुत | great |
| संपति | धन-संपत्ति | wealth |
| मागत | माँगते समय | when asking for |
| सकुचाई | संकोच करता है | hesitates |
2 तासु प्रभा जान नहिं सोई। तथा हृदयँ मम संसय होई।।
English explanation
That person does not know the tree’s power; likewise, doubt arises in my heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तासु | उस वृक्ष की | that tree’s |
| प्रभा | शक्ति | power |
| जान | जानता है | knows |
| नहिं | नहीं | not |
| सोई | वही दरिद्र व्यक्ति | that poor person |
| तथा | उसी प्रकार | likewise |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| मम | मेरे | my |
| संसय | संशय | doubt |
| होई | होता है | arises |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.149
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 156
- सहायक विषय
- मनु-शतरूपा-तप एवं वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 155, 156
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।