बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सो तुम्ह जानहु अंतरजामी। पुरवहु मोर मनोरथ स्वामी।।
मूल पाठ
सो तुम्ह जानहु अंतरजामी। पुरवहु मोर मनोरथ स्वामी।।
सकुच बिहाइ मागु नृप मोहि। मोरें नहिं अदेय कछु तोही।।
स्रोत अभिलेख 1.149 · पुस्तक पृ. 155, 156
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे स्वामी! आप अन्तर्यामी हैं, इसलिये उसे जानते ही हैं। मेरा वह मनोरथ पूरा कीजिये। [भगवान्ने कहा—] हे राजन्! संकोच छोड़कर मुझसे माँगो। तुम्हें न दे सकूँ ऐसा मेरे पास कुछ भी नहीं है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 156 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सो तुम्ह जानहु अंतरजामी। पुरवहु मोर मनोरथ स्वामी।।
English explanation
O knower of hearts, you know that desire. O Lord, fulfill my wish.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | उस इच्छा को | that desire |
| तुम्ह | आप | you |
| जानहु | जानते हैं | know |
| अंतरजामी | हे हृदय की बात जाननेवाले | O knower of hearts |
| पुरवहु | पूरा कीजिए | please fulfill |
| मोर | मेरा | my |
| मनोरथ | मन की इच्छा | heart’s desire |
| स्वामी | हे स्वामी | O Lord |
2 सकुच बिहाइ मागु नृप मोहि। मोरें नहिं अदेय कछु तोही।।
English explanation
O king, set aside hesitation and ask of me; there is nothing I cannot give you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकुच | संकोच | hesitation |
| बिहाइ | छोड़कर | setting aside |
| मागु | माँगो | ask |
| नृप | हे राजन् | O king |
| मोहि | मुझसे | of me |
| मोरें | मेरे लिए | for me |
| नहिं | नहीं | not |
| अदेय | जो दिया न जा सके | impossible to give |
| कछु | कुछ भी | anything |
| तोही | तुम्हें | to you |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.149
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 156
- सहायक विषय
- मनु-शतरूपा-तप एवं वरदान
- मुद्रित पृष्ठ
- 155, 156
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।