बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चितवहिं चकित बिचित्र बिताना। रचना सकल अलौकिक नाना।।
मूल पाठ
चितवहिं चकित बिचित्र बिताना। रचना सकल अलौकिक नाना।।
नगर नारि नर रूप निधाना। सुघर सुधरम सुसील सुजाना।।
स्रोत अभिलेख 1.314 · पुस्तक पृ. 295, 295
भावार्थ
मूल पाठ के बादविचित्र मण्डपको तथा नाना प्रकारकी सब अलौकिक रचनाओंको वे चकित होकर देख रहे हैं। नगरके स्त्री-पुरुष रूपके भण्डार, सुघड़, श्रेष्ठ धर्मात्मा, सुशील और सुजान हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 295 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 चितवहिं चकित बिचित्र बिताना। रचना सकल अलौकिक नाना।।
English explanation
They gaze in wonder at the marvelous canopies; all the varied arrangements are extraordinary.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चितवहिं | देखते हैं | gaze at |
| चकित | चकित होकर | in wonder |
| बिचित्र | अद्भुत; विचित्र | marvelous |
| बिताना | वितान; सजावटी चंदोवे | decorative canopies |
| रचना | सजावट; व्यवस्था | decorative arrangements |
| सकल | समस्त | all |
| अलौकिक | साधारण जगत से बढ़कर अद्भुत | extraordinary; beyond the ordinary |
| नाना | विविध प्रकार की | of many kinds |
2 नगर नारि नर रूप निधाना। सुघर सुधरम सुसील सुजाना।।
English explanation
The city’s women and men are treasures of beauty—graceful, righteous, well-mannered, and discerning.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नगर | नगर के | of the city |
| नारि | स्त्रियाँ | women |
| नर | पुरुष | men |
| रूप | सौंदर्य के | of beauty |
| निधाना | भंडार | treasures; repositories |
| सुघर | सुघड़; सुगढ़ आचरण वाले | graceful and accomplished |
| सुधरम | धर्म का उत्तम पालन करने वाले | righteous in conduct |
| सुसील | अच्छे स्वभाव और आचरण वाले | well-mannered and virtuous |
| सुजाना | समझदार | discerning |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.314
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 295
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 295, 295
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