बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तिन्हहि देखि सब सुर सुरनारीं। भए नखत जनु बिधु उजिआरीं।।
मूल पाठ
तिन्हहि देखि सब सुर सुरनारीं। भए नखत जनु बिधु उजिआरीं।।
बिधिहि भयह आचरजु बिसेषी। निज करनी कछु कतहुँ न देखी।।
स्रोत अभिलेख 1.314 · पुस्तक पृ. 295, 295
भावार्थ
मूल पाठ के बादउन्हें देखकर सब देवता और देवाङ्गनाएँ ऐसे प्रभाहीन हो गये जैसे चन्द्रमाके उजियालेमें तारागण फीके पड़ जाते हैं। ब्रह्माजीको विशेष आश्चर्य हुआ; क्योंकि वहाँ उन्होंने अपनी कोई करनी (रचना) तो कहीं देखी ही नहीं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 295 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तिन्हहि देखि सब सुर सुरनारीं। भए नखत जनु बिधु उजिआरीं।।
English explanation
On seeing them, all the gods and celestial women became like stars in the moonlight.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तिन्हहि | उन्हीं नगरवासियों को | those very townspeople |
| देखि | देखकर | on seeing |
| सब | सभी | all |
| सुर | देवता | gods |
| सुरनारीं | देवांगनाएँ | celestial women |
| भए | हो गए | became |
| नखत | तारे | stars |
| जनु | मानो | as though |
| बिधु | चंद्रमा की | of the moon |
| उजिआरीं | उजियाली में | in the light |
2 बिधिहि भयह आचरजु बिसेषी। निज करनी कछु कतहुँ न देखी।।
English explanation
Brahma was greatly astonished; nowhere did he see anything of his own creation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिधिहि | ब्रह्मा को | to Brahma, the creator |
| भयह | हुआ | arose; occurred |
| आचरजु | आश्चर्य | astonishment |
| बिसेषी | बहुत अधिक | very great |
| निज | अपनी | his own |
| करनी | रचना | creation |
| कछु | कुछ भी | anything |
| कतहुँ | कहीं भी | anywhere |
| न | नहीं | not |
| देखी | देखी | saw |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.314
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 295
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 295, 295
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।