बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रेम पुलक तन हृदयँ उछाहू। चले बिलोकन राम बिआहू।।
मूल पाठ
प्रेम पुलक तन हृदयँ उछाहू। चले बिलोकन राम बिआहू।।
देखि जनकपुरु सुर अनुरागे। निज निज लोक सबहिं लघु लागे।।
स्रोत अभिलेख 1.314 · पुस्तक पृ. 295, 295
भावार्थ
मूल पाठ के बादऔर पे्रमसे पुलकित-शरीर हो तथा हृदयमें उत्साह भरकर श्रीरामचन्द्रजीका विवाह देखने चले। जनकपुरको देखकर देवता इतने अनुरक्त हो गये कि उन सबको अपने-अपने लोक बहुत तुच्छ लगने लगे॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 295 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 प्रेम पुलक तन हृदयँ उछाहू। चले बिलोकन राम बिआहू।।
English explanation
Their bodies thrilled with love and their hearts were full of enthusiasm; they set out to see Rama’s wedding.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रेम | प्रेम से | with love |
| पुलक | रोमांच | thrill; hair standing on end |
| तन | शरीर में | in their bodies |
| हृदयँ | हृदय में | in their hearts |
| उछाहू | उत्साह | enthusiasm |
| चले | चल पड़े | set out |
| बिलोकन | देखने के लिए | to see |
| राम | भगवान राम का | of Lord Rama |
| बिआहू | विवाह | wedding |
2 देखि जनकपुरु सुर अनुरागे। निज निज लोक सबहिं लघु लागे।।
English explanation
Seeing Janakpur, the gods were captivated; their own respective realms seemed insignificant to them all.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | on seeing |
| जनकपुरु | राजा जनक की नगरी जनकपुर | Janakpur, King Janaka’s city |
| सुर | देवता | the gods |
| अनुरागे | मुग्ध हो गए | became captivated |
| निज | अपने | their own |
| निज | अपने; प्रत्येक के अलग-अलग | respective |
| लोक | लोक | realms |
| सबहिं | सभी को | to all of them |
| लघु | तुच्छ | insignificant |
| लागे | प्रतीत हुए | seemed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.314
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 295
- सहायक विषय
- बारातका जनकपुरमें आना और स्वागतादि
- मुद्रित पृष्ठ
- 295, 295
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।