बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
घंट घंटि धुनि बरनि न जाहीं। सरव करहिं पाइक फहराहीं।।
मूल पाठ
घंट घंटि धुनि बरनि न जाहीं। सरव करहिं पाइक फहराहीं।।
करहिं बिदूषक कौतुक नाना। हास कुसल कल गान सुजाना ।
स्रोत अभिलेख 1.302 · पुस्तक पृ. 285, 285
भावार्थ
मूल पाठ के बादघंटे-घंटियोंकी ध्वनिका वर्णन नहीं हो सकता। पैदल चलनेवाले सेवकगण अथवा पट्टेबाज कसरतके खेल कर रहे हैं और फहरा रहे हैं (आकाशमें ऊँचे उछलते हुए जा रहे हैं)। हँसी करनेमें निपुण और सुन्दर गानेमें चतुर विदूषक (मसखरे) तरह-तरहके तमाशे कर रहे हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 285 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 घंट घंटि धुनि बरनि न जाहीं। सरव करहिं पाइक फहराहीं।।
English explanation
The sound of bells large and small is beyond description. Foot soldiers make a clamor and stride with spirited swagger.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| घंट | बड़े घंटे | large bells |
| घंटि | छोटी घंटियाँ | small bells |
| धुनि | ध्वनि | sound |
| बरनि | वर्णन की | described |
| न | नहीं | not |
| जाहीं | जा सकती | can be |
| सरव | शोर; कोलाहल | noise; clamor |
| करहिं | करते हैं | make |
| पाइक | पैदल सैनिक | foot soldiers |
| फहराहीं | अकड़ते-इठलाते चलते हैं | stride with swagger |
2 करहिं बिदूषक कौतुक नाना। हास कुसल कल गान सुजाना ।
English explanation
Jesters skilled in humor and versed in sweet singing perform varied entertainments.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करहिं | करते हैं | perform |
| बिदूषक | विदूषक; हास्य कलाकार | jesters; comic performers |
| कौतुक | मनोरंजक खेल | amusing entertainments |
| नाना | अनेक प्रकार के | of many kinds |
| हास | हँसाने में | in making people laugh |
| कुसल | कुशल | skilled |
| कल | मधुर | sweet; melodious |
| गान | गायन में | in singing |
| सुजाना | जानकार; निपुण | knowledgeable; adept |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.302
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 285
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 285, 285
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।