बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गै निसि बहुत सयन अब कीजे। मोहि तोहि भूप भेंट दिन तीजे।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे राजन्! रात बहुत बीत गयी, अब सो जाओ। आजसे तीसरे दिन मुझसे तुम्हारी भेंट होगी। तपके बलसे मैं घोड़ेसहित तुमको सोतेहीमें घर पहुँचा दूँगा॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 172 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
गै निसि बहुत सयन अब कीजे। मोहि तोहि भूप भेंट दिन तीजे।।
मैं तपबल तोहि तुरग समेता। पहुँचेहउँ सोवतहि निकेता।।
स्रोत अभिलेख 1.169 · पुस्तक पृ. 172, 172
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 गै निसि बहुत सयन अब कीजे। मोहि तोहि भूप भेंट दिन तीजे।।
English explanation
Much of the night has passed; now go to sleep. O king, you and I will meet on the third day.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गै | बीत गई | has passed |
| निसि | रात | the night |
| बहुत | बहुत | much |
| सयन | शयन | sleep |
| अब | अब | now |
| कीजे | कीजिए | please do |
| मोहि | मेरी | my |
| तोहि | तुम्हारी | your |
| भूप | हे राजन् | O king |
| भेंट | भेंट होगी | meeting will occur |
| दिन | दिन | day |
| तीजे | तीसरे | on the third |
2 मैं तपबल तोहि तुरग समेता। पहुँचेहउँ सोवतहि निकेता।।
English explanation
By the power of austerity, I will take you home with your horse while you are still asleep.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मैं | मैं | I |
| तपबल | तपस्या के बल से | by the power of austerity |
| तोहि | तुम्हें | you |
| तुरग | घोड़े | horse |
| समेता | सहित | along with |
| पहुँचेहउँ | पहुँचा दूँगा | will convey |
| सोवतहि | सोते हुए ही | while still asleep |
| निकेता | घर | home |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.169
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 172
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 172, 172
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।