बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गुर रघुपति सब मुनि मन माहीं। मुदित भए पुनि पुनि पुलकाहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दगुरु विश्वामित्रजी, श्रीरघुनाथजी और सब मुनि मनमें प्रसन्न हुए और बार-बार पुलकित होने लगे। श्रीरामचन्द्रजीने इशारेसे लक्ष्मणको मना किया और प्रेमसहित अपने पास बैठा लिया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 246 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
गुर रघुपति सब मुनि मन माहीं। मुदित भए पुनि पुनि पुलकाहीं।।
सयनहिं रघुपति लखनु नेवारे। प्रेम समेत निकट बैठारे।।
स्रोत अभिलेख 1.254 · पुस्तक पृ. 246, 247
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 गुर रघुपति सब मुनि मन माहीं। मुदित भए पुनि पुनि पुलकाहीं।।
English explanation
The guru Vishvamitra, Rama, and all the sages rejoiced inwardly and repeatedly thrilled with delight.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुर | गुरु विश्वामित्र | the guru Vishvamitra |
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी राम | Rama, lord of the Raghu lineage |
| सब | सभी | all |
| मुनि | मुनि | sages |
| मन | मन | the mind |
| माहीं | में | within |
| मुदित | प्रसन्न | joyful |
| भए | हुए | became |
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | again |
| पुलकाहीं | रोमांचित होते हैं | thrill with delight |
2 सयनहिं रघुपति लखनु नेवारे। प्रेम समेत निकट बैठारे।।
English explanation
Rama restrained Lakshmana with a gesture alone and lovingly seated him nearby.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सयनहिं | संकेत से ही | with a gesture alone |
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी राम | Rama, lord of the Raghu lineage |
| लखनु | लक्ष्मण को | Lakshmana |
| नेवारे | रोक दिया | restrained |
| प्रेम | प्रेम | love |
| समेत | सहित | with |
| निकट | पास | nearby |
| बैठारे | बैठाया | seated him |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.254
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 246
- सहायक विषय
- श्रीलक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 246, 247
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।