बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिस्वामित्र समय सुभ जानी। बोले अति सनेहमय बानी।।
मूल पाठ
बिस्वामित्र समय सुभ जानी। बोले अति सनेहमय बानी।।
उठहु राम भंजहु भवचापा। मेटहु तात जनक परितापा।।
स्रोत अभिलेख 1.254 · पुस्तक पृ. 246, 247
भावार्थ
मूल पाठ के बादविश्वामित्रजी शुभ समय जानकर अत्यन्त प्रेमभरी वाणी बोले—हे राम! उठो, शिवजीका धनुष तोड़ो और हे तात! जनकका सन्ताप मिटाओ॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 246 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बिस्वामित्र समय सुभ जानी। बोले अति सनेहमय बानी।।
English explanation
Recognizing the moment as auspicious, Vishvamitra spoke with great affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिस्वामित्र | मुनि विश्वामित्र | the sage Vishvamitra |
| समय | समय को | the moment |
| सुभ | शुभ | auspicious |
| जानी | जानकर | recognizing |
| बोले | कहा | spoke |
| अति | अत्यंत | very |
| सनेहमय | स्नेह से भरी | filled with affection |
| बानी | वाणी | words |
2 उठहु राम भंजहु भवचापा। मेटहु तात जनक परितापा।।
English explanation
Rise, Rama, and break Shiva’s bow. Dear son, relieve Janaka’s distress.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उठहु | उठो | rise |
| राम | हे राम | O Rama |
| भंजहु | तोड़ो | break |
| भवचापा | शिव का धनुष | Shiva’s bow |
| मेटहु | मिटाओ | remove |
| तात | हे प्रिय पुत्र | dear son |
| जनक | जनक का | Janaka’s |
| परितापा | संताप | distress |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.254
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 246
- सहायक विषय
- श्रीलक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 246, 247
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।