बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि गुरु बचन चरन सिरु नावा। हरषु बिषादु न कछु उर आवा।।
मूल पाठ
सुनि गुरु बचन चरन सिरु नावा। हरषु बिषादु न कछु उर आवा।।
ठाढ़े भए उठि सहज सुभाएँ। ठवनि जुबा मृगराजु लजाएँ।।
स्रोत अभिलेख 1.254 · पुस्तक पृ. 246, 247
भावार्थ
मूल पाठ के बादगुरुके वचन सुनकर श्रीरामजीने चरणोंमें सिर नवाया। उनके मनमें न हर्ष हुआ, न विषाद; और वे अपनी ऐंड़ (खड़े होनेकी शान) से जवान सिंहको भी लजाते हुए सहज स्वभावसे ही उठ खड़े हुए॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 247 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुनि गुरु बचन चरन सिरु नावा। हरषु बिषादु न कछु उर आवा।।
English explanation
Hearing the guru’s words, Rama bowed his head at his feet. Neither joy nor sorrow arose in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| गुरु | गुरु के | the guru’s |
| बचन | वचन | words |
| चरन | चरणों में | at his feet |
| सिरु | सिर | his head |
| नावा | झुकाया | bowed |
| हरषु | हर्ष | joy |
| बिषादु | विषाद | sorrow |
| न | नहीं | not |
| कछु | कुछ भी | any at all |
| उर | हृदय में | in his heart |
| आवा | आया | arose |
2 ठाढ़े भए उठि सहज सुभाएँ। ठवनि जुबा मृगराजु लजाएँ।।
English explanation
Rama rose and stood with natural ease. His stance put even a young lion to shame.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ठाढ़े | खड़े | standing |
| भए | हुए | became |
| उठि | उठकर | having risen |
| सहज | सहज | natural |
| सुभाएँ | भाव से | with ease of manner |
| ठवनि | खड़े होने की मुद्रा | his standing posture |
| जुबा | युवा | young |
| मृगराजु | सिंह को | the lion |
| लजाएँ | लजा दिया | put to shame |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.254
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 247
- सहायक विषय
- श्रीलक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 246, 247
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।