बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गुरहि प्रनामु मनहि मन कीन्हा। अति लाघवँ उठाइ धनु लीन्हा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमन-ही-मन उन्होंने गुरुको प्रणाम किया और बड़ी फुर्तीसे धनुषको उठा लिया। जब उसे [हाथमें] लिया, तब वह धनुष बिजलीकी तरह चमका और फिर आकाशमें मण्डल-जैसा (मण्डलाकार) हो गया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 252 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
गुरहि प्रनामु मनहि मन कीन्हा। अति लाघवँ उठाइ धनु लीन्हा।।
दमकेउ दामिनि जिमि जब लयऊ। पुनि नभ धनु मंडल सम भयऊ।।
स्रोत अभिलेख 1.261 · पुस्तक पृ. 252, 252
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 गुरहि प्रनामु मनहि मन कीन्हा। अति लाघवँ उठाइ धनु लीन्हा।।
English explanation
Rama inwardly bowed to his teacher and lifted the bow with great deftness and ease.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुरहि | गुरु को | to his teacher |
| प्रनामु | प्रणाम | a reverential bow |
| मनहि | मन ही में | within his mind alone |
| मन | मन; भीतर ही भीतर | mind; inwardly |
| कीन्हा | किया | performed |
| अति | अत्यंत | with great |
| लाघवँ | फुर्ती और सहजता से | deftness and ease |
| उठाइ | उठाकर | having lifted |
| धनु | धनुष | the bow |
| लीन्हा | ले लिया | took up |
2 दमकेउ दामिनि जिमि जब लयऊ। पुनि नभ धनु मंडल सम भयऊ।।
English explanation
When Rama took up the bow, it flashed like lightning; then it became like the arc of a rainbow in the sky.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दमकेउ | चमक उठा | flashed |
| दामिनि | बिजली | lightning |
| जिमि | जैसे | like |
| जब | जब | when |
| लयऊ | उठा लिया | took up |
| पुनि | फिर | then |
| नभ | आकाश का | of the sky |
| धनु | धनुष; यहाँ इंद्रधनुष | bow; here, rainbow |
| मंडल | चाप; घुमावदार आकार | arc; curved shape |
| सम | के समान | like |
| भयऊ | हो गया | became |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.261
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 252
- सहायक विषय
- धनुषभंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 252, 252
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