बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लेत चढ़ावत खैंचत गाढ़ें। काहुँ न लखा देख सबु ठाढ़ें।।
मूल पाठ
लेत चढ़ावत खैंचत गाढ़ें। काहुँ न लखा देख सबु ठाढ़ें।।
तेहि छन राम मध्य धनु तोरा। भरे भुवन धुनि घोर कठोरा।।
स्रोत अभिलेख 1.261 · पुस्तक पृ. 252, 252
भावार्थ
मूल पाठ के बादलेते, चढ़ाते और जोरसे खींचते हुए किसीने नहीं लखा (अर्थात् ये तीनों काम इतनी फुर्तीसे हुए कि धनुषको कब उठाया, कब चढ़ाया और कब खींचा, इसका किसीको पता नहीं लगा); सबने श्रीरामजीको [धनुष खींचे] खड़े देखा। उसी क्षण श्रीरामजीने धनुषको बीचसे तोड़ डाला। भयङ्कर कठोर ध्वनिसे [सब] लोक भर गये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 252 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 लेत चढ़ावत खैंचत गाढ़ें। काहुँ न लखा देख सबु ठाढ़ें।।
English explanation
No one could discern Rama taking up the bow, stringing it, and drawing it firmly, though everyone stood watching.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लेत | लेते हुए | taking up |
| चढ़ावत | प्रत्यंचा चढ़ाते हुए | stringing the bow |
| खैंचत | खींचते हुए | drawing the bow |
| गाढ़ें | जोर से; दृढ़ता से | firmly; forcefully |
| काहुँ | किसी ने भी | anyone |
| न | नहीं | not |
| लखा | देख पाया | could discern |
| देख | देख रहे थे | were watching |
| सबु | सब लोग | everyone |
| ठाढ़ें | खड़े हुए | standing |
2 तेहि छन राम मध्य धनु तोरा। भरे भुवन धुनि घोर कठोरा।।
English explanation
At that very moment, Rama broke the bow in the middle; its fierce, harsh sound filled the worlds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उसी | that very |
| छन | क्षण में | at the moment |
| राम | राम ने | Rama |
| मध्य | बीच से | in the middle |
| धनु | धनुष | the bow |
| तोरा | तोड़ दिया | broke |
| भरे | भर गए | were filled |
| भुवन | लोक; संसार | the worlds |
| धुनि | ध्वनि से | with the sound |
| घोर | भयंकर | fierce; terrifying |
| कठोरा | कठोर; कर्कश | harsh |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.261
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 252
- सहायक विषय
- धनुषभंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 252, 252
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