बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
का बरषा सब कृषी सुखानें। समय चुकें पुनि का पछितानें।।
मूल पाठ
का बरषा सब कृषी सुखानें। समय चुकें पुनि का पछितानें।।
अस जियँ जानि जानकी देखी। प्रभु पुलके लखि प्रीति बिसेषी।।
स्रोत अभिलेख 1.261 · पुस्तक पृ. 252, 252
भावार्थ
मूल पाठ के बादसारी खेतीके सूख जानेपर वर्षा किस कामकी? समय बीत जानेपर फिर पछतानेसे क्या लाभ? जीमें ऐसा समझकर श्रीरामजीने जानकीजीकी ओर देखा और उनका विशेष प्रेम लखकर वे पुलकित हो गये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 252 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 का बरषा सब कृषी सुखानें। समय चुकें पुनि का पछितानें।।
English explanation
What good is rain once all the crops have dried up? What good is regret after the opportunity has passed?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| का | क्या लाभ | what good |
| बरषा | वर्षा का | is rain |
| सब | सारी | all |
| कृषी | फसल | the crops |
| सुखानें | सूख जाने पर | once dried up |
| समय | उचित समय; अवसर | the right time; opportunity |
| चुकें | चूक जाने पर | once missed |
| पुनि | फिर | then; afterward |
| का | क्या लाभ | what good |
| पछितानें | पछताने से | is regretting |
2 अस जियँ जानि जानकी देखी। प्रभु पुलके लखि प्रीति बिसेषी।।
English explanation
Understanding this in his heart, Rama looked at Janaki; seeing her exceptional love, the Lord thrilled with joy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus; this |
| जियँ | हृदय में | in his heart |
| जानि | समझकर | having understood |
| जानकी | जनक की पुत्री सीता को | Sita, daughter of Janaka |
| देखी | देखा | looked at |
| प्रभु | प्रभु राम | the Lord, Rama |
| पुलके | रोमांचित हुए | thrilled with joy |
| लखि | देखकर | seeing |
| प्रीति | प्रेम | love |
| बिसेषी | विशेष; असाधारण | exceptional; extraordinary |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.261
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 252
- सहायक विषय
- धनुषभंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 252, 252
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।