बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गाधितनय मन चिंता ब्यापी। हरि बिनु मरहि न निसिचर पापी।।
मूल पाठ
गाधितनय मन चिंता ब्यापी। हरि बिनु मरहि न निसिचर पापी।।
तब मुनिवर मन कीन्ह बिचारा। प्रभु अवतरेउ हरन महि भारा।।
स्रोत अभिलेख 1.206 · पुस्तक पृ. 204, 205
भावार्थ
मूल पाठ के बादगाधिके पुत्र विश्वामित्रजीके मनमें चिन्ता छा गयी कि ये पापी राक्षस भगवान्के [मारे] बिना न मरेंगे। तब श्रेष्ठ मुनिने मनमें विचार किया कि प्रभुने पृथ्वीका भार हरनेके लिये अवतार लिया है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 204 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 गाधितनय मन चिंता ब्यापी। हरि बिनु मरहि न निसिचर पापी।।
English explanation
Anxiety filled the mind of Vishvamitra, son of Gadhi: without Hari, these wicked demons will not die.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गाधितनय | गाधि के पुत्र विश्वामित्र | Vishvamitra, son of Gadhi |
| मन | मन में | in the mind |
| चिंता | चिंता | anxiety |
| ब्यापी | छा गई | spread; filled |
| हरि | भगवान हरि | Lord Hari |
| बिनु | बिना | without |
| मरहि | मरेंगे | will die |
| न | नहीं | not |
| निसिचर | राक्षस | demons |
| पापी | पापी; दुष्ट | sinful; wicked |
2 तब मुनिवर मन कीन्ह बिचारा। प्रभु अवतरेउ हरन महि भारा।।
English explanation
Then the eminent sage reflected: the Lord has incarnated to remove the earth's burden.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| मुनिवर | श्रेष्ठ मुनि विश्वामित्र | the eminent sage Vishvamitra |
| मन | मन में | within his mind |
| कीन्ह | किया | made; undertook |
| बिचारा | विचार | reflection |
| प्रभु | प्रभु राम | the Lord, Rama |
| अवतरेउ | अवतरित हुए हैं | has incarnated |
| हरन | हरने; दूर करने के लिए | to remove |
| महि | पृथ्वी का | of the earth |
| भारा | भार | burden |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.206
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 204
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 204, 205
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।