बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जहँ जप जग्य मुनि करही। अति मारीच सुबाहुहि डरहीं।।
मूल पाठ
जहँ जप जग्य मुनि करही। अति मारीच सुबाहुहि डरहीं।।
देखत जग्य निसाचर धावहि। करहि उपद्रव मुनि दुख पावहिं।।
स्रोत अभिलेख 1.206 · पुस्तक पृ. 204, 205
भावार्थ
मूल पाठ के बादजहाँ वे मुनि जप, यज्ञ और योग करते थे, परन्तु मारीच और सुबाहुसे बहुत डरते थे। यज्ञ देखते ही राक्षस दौड़ पड़ते थे और उपद्रव मचाते थे, जिससे मुनि [बहुत] दु:ख पाते थे॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 204 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जहँ जप जग्य मुनि करही। अति मारीच सुबाहुहि डरहीं।।
English explanation
There the sage performs sacred recitation and sacrifices, but greatly fears Maricha and Subahu.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जहँ | जहाँ; वहाँ | where; there |
| जप | मंत्रों का जप | sacred recitation |
| जग्य | यज्ञ | ritual sacrifice |
| मुनि | मुनि विश्वामित्र | the sage Vishvamitra |
| करही | करते हैं | performs |
| अति | बहुत | greatly |
| मारीच | राक्षस मारीच से | Maricha, the demon |
| सुबाहुहि | राक्षस सुबाहु से | Subahu, the demon |
| डरहीं | डरते हैं | fears |
2 देखत जग्य निसाचर धावहि। करहि उपद्रव मुनि दुख पावहिं।।
English explanation
As soon as they see a sacrifice, the demons rush in and cause disruption; the sage suffers distress.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखत | देखते ही | upon seeing |
| जग्य | यज्ञ | the sacrifice |
| निसाचर | राक्षस | demons; night-roaming beings |
| धावहि | दौड़ पड़ते हैं | rush in |
| करहि | करते हैं | cause |
| उपद्रव | विघ्न; उत्पात | disruption; havoc |
| मुनि | मुनि विश्वामित्र | the sage Vishvamitra |
| दुख | दुख; कष्ट | distress |
| पावहिं | पाते हैं; सहते हैं | experiences; suffers |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.206
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 204
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 204, 205
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