बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एहुँ मिस देखौं पद जाई। करि बिनती आनौ दोउ भाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दइसी बहाने जाकर मैं उनके चरणोंका दर्शन करूँ और विनती करके दोनों भाइयोंको ले आऊँ। [अहा!] जो ज्ञान, वैराग्य और सब गुणोंके धाम हैं, उन प्रभुको मैं नेत्र भरकर देखूँगा॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 205 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
एहुँ मिस देखौं पद जाई। करि बिनती आनौ दोउ भाई।।
ग्यान बिराग सकल गुन अयना। सो प्रभु मै देखब भरि नयना।।
स्रोत अभिलेख 1.206 · पुस्तक पृ. 204, 205
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 एहुँ मिस देखौं पद जाई। करि बिनती आनौ दोउ भाई।।
English explanation
On this pretext, let me go and behold the Lord's feet, and, after making my request, bring both brothers back.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहुँ | इसी; इस भी | this very; this also |
| मिस | बहाने; अवसर से | pretext; occasion |
| देखौं | मैं दर्शन करूँ | let me behold |
| पद | प्रभु के चरण | the Lord's feet |
| जाई | जाकर | having gone |
| करि | करके | having made |
| बिनती | विनती; प्रार्थना | a request; entreaty |
| आनौ | मैं ले आऊँ | let me bring back |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाई, राम और लक्ष्मण | brothers, Rama and Lakshmana |
2 ग्यान बिराग सकल गुन अयना। सो प्रभु मै देखब भरि नयना।।
English explanation
I shall gaze to my heart's content upon that Lord, the abode of knowledge, detachment, and every virtue.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ग्यान | ज्ञान | knowledge; spiritual wisdom |
| बिराग | वैराग्य; आसक्ति से मुक्ति | detachment |
| सकल | सभी | all |
| गुन | गुण | virtues |
| अयना | धाम; निवासस्थान | abode; repository |
| सो | वे; उन | that; those |
| प्रभु | प्रभु राम | the Lord, Rama |
| मै | मैं | I |
| देखब | देखूँगा | shall behold |
| भरि | भरकर; तृप्त करके | filling; satisfying |
| नयना | आँखें | the eyes |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.206
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 205
- सहायक विषय
- श्रीभगवान्का प्राकट्य और बाललीलाका आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 204, 205
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।