बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
खेलत रहे तहाँ सुधि पाई। आए भरतु सहित हित भाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दभरतजी अपने मित्रों और भाई शत्रुघ्नके साथ जहाँ खेलते थे, वहीं समाचार पाकर वे आ गये। बहुत प्रेमसे सकुचाते हुए पूछते हैं—पिताजी! चि_ी कहाँसे आयी है?॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 276 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
खेलत रहे तहाँ सुधि पाई। आए भरतु सहित हित भाई।।
पूछत अति सनेहँ सकुचाई। तात कहाँ तें पाती आई।।
स्रोत अभिलेख 1.29 · पुस्तक पृ. 275, 276
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 खेलत रहे तहाँ सुधि पाई। आए भरतु सहित हित भाई।।
English explanation
Bharata received the news where he was playing and came with his affectionate brother Shatrughna.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| खेलत | खेलते | playing |
| रहे | थे | were |
| तहाँ | वहाँ | there |
| सुधि | खबर | news |
| पाई | प्राप्त की | received |
| आए | आए | came |
| भरतु | भरत, राम के भाई | Bharata, Rama’s brother |
| सहित | के साथ | with |
| हित | स्नेही | affectionate |
| भाई | भाई शत्रुघ्न | his brother Shatrughna |
2 पूछत अति सनेहँ सकुचाई। तात कहाँ तें पाती आई।।
English explanation
With deep affection and modest hesitation, Bharata asks, ‘Father, where has this letter come from?’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पूछत | पूछते हैं | asks |
| अति | बहुत | deeply |
| सनेहँ | प्रेम से | with affection |
| सकुचाई | संकोच करके | with modest hesitation |
| तात | पिताजी | Father |
| कहाँ | कहाँ | where |
| तें | से | from |
| पाती | पत्र | the letter |
| आई | आया है | has come |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.29
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 276
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 275, 276
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।