बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कौसिक कहा छमिअ अपराधू। बाल दोष गुन गनहिं न साधू।।
मूल पाठ
कौसिक कहा छमिअ अपराधू। बाल दोष गुन गनहिं न साधू।।
खर कुठार मैं अकरुन कोही। आगें अपराधी गुरुद्रोही।।
स्रोत अभिलेख 1.275 · पुस्तक पृ. 263, 264
भावार्थ
मूल पाठ के बादविश्वामित्रजीने कहा—अपराध क्षमा कीजिये। बालकोंके दोष और गुणको साधुलोग नहीं गिनते। [परशुरामजी बोले—] तीखी धारका कुठार, मैं दयारहित और क्रोधी, और यह गुरुद्रोही और अपराधी मेरे सामने—॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 263 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कौसिक कहा छमिअ अपराधू। बाल दोष गुन गनहिं न साधू।।
English explanation
Vishvamitra said, “Forgive the offense; holy people do not reckon children’s faults and merits.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कौसिक | विश्वामित्र, कुशिकवंशी ऋषि | Vishvamitra, sage of Kushika’s lineage |
| कहा | ने कहा | said |
| छमिअ | क्षमा कीजिए | please forgive |
| अपराधू | अपराध | the offense |
| बाल | बालकों के | children’s |
| दोष | दोष | faults |
| गुन | गुण | merits |
| गनहिं | गिनते हैं | reckon |
| न | नहीं | not |
| साधू | साधुजन | holy people |
2 खर कुठार मैं अकरुन कोही। आगें अपराधी गुरुद्रोही।।
English explanation
The axe is sharp, and I am merciless and wrathful; before me stands an offender who acts against the guru.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| खर | तीखा | sharp |
| कुठार | फरसा | axe |
| मैं | मैं | I |
| अकरुन | करुणारहित | merciless |
| कोही | क्रोधी | wrathful |
| आगें | सामने | before me |
| अपराधी | अपराध करने वाला | an offender |
| गुरुद्रोही | गुरु से द्रोह करने वाला | one hostile to the guru |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.275
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 263
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 263, 264
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।