बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
उतर देत छोड़उँ बिनु मारें। केवल कौसिक सील तुम्हारें।।
मूल पाठ
उतर देत छोड़उँ बिनु मारें। केवल कौसिक सील तुम्हारें।।
न त एहि काटि कुठार कठोरें। गुरहि उरिन होतेउँ श्रम थोरें।।
स्रोत अभिलेख 1.275 · पुस्तक पृ. 263, 264
भावार्थ
मूल पाठ के बादउत्तर दे रहा है। इतनेपर भी मैं इसे बिना मारे छोड़ रहा हूँ, सो हे विश्वामित्र! केवल तुम्हारे शील (प्रेम) से। नहीं तो इसे इस कठोर कुठारसे काटकर थोड़े ही परिश्रमसे गुरुसे उऋण हो जाता॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 264 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 उतर देत छोड़उँ बिनु मारें। केवल कौसिक सील तुम्हारें।।
English explanation
Vishvamitra, though he talks back, I am letting him go without killing him solely out of regard for your noble character.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उतर | प्रत्युत्तर | a retort |
| देत | देते हुए | giving |
| छोड़उँ | मैं छोड़ता हूँ | I let him go |
| बिनु | बिना | without |
| मारें | मारे | killing him |
| केवल | केवल | solely |
| कौसिक | हे विश्वामित्र | O Vishvamitra |
| सील | शील के कारण | because of noble character |
| तुम्हारें | आपके | your |
2 न त एहि काटि कुठार कठोरें। गुरहि उरिन होतेउँ श्रम थोरें।।
English explanation
Otherwise, by cutting him down with the hard axe, I would have discharged my debt to my guru with little effort.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| न | नहीं | if not |
| त | तो | then |
| एहि | इसे | him |
| काटि | काटकर | having cut down |
| कुठार | फरसे से | with the axe |
| कठोरें | कठोर | hard |
| गुरहि | गुरु के प्रति | to my guru |
| उरिन | ऋणमुक्त | free of debt |
| होतेउँ | हो जाता मैं | I would have become |
| श्रम | परिश्रम | effort |
| थोरें | थोड़े से | with little |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.275
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 264
- सहायक विषय
- श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 263, 264
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।