बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कोल कराल दसन छबि गाई। तनु बिसाल पीवर अधिकाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयह तो सूअरके भयानक दाँतोंकी शोभा कही गयी। [इधर] उसका शरीर भी बहुत विशाल और मोटा था। घोड़ेकी आहट पाकर वह घुरघुराता हुआ कान उठाये चौकन्ना होकर देख रहा था॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 162 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कोल कराल दसन छबि गाई। तनु बिसाल पीवर अधिकाई।।
घुरुघुरात हय आरौ पाएँ। चकित बिलोकत कान उठाएँ।।
स्रोत अभिलेख 1.156 · पुस्तक पृ. 161, 162
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कोल कराल दसन छबि गाई। तनु बिसाल पीवर अधिकाई।।
English explanation
Thus the appearance of the boar's fearsome tusks has been described; its body was huge and exceedingly bulky.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोल | सूअर के | of the boar |
| कराल | भयंकर | fearsome |
| दसन | दाँतों की | tusks |
| छबि | छवि | appearance |
| गाई | वर्णित की गई | has been described |
| तनु | शरीर | body |
| बिसाल | विशाल | huge |
| पीवर | मोटा-तगड़ा | stout and bulky |
| अधिकाई | अत्यंत | exceedingly |
2 घुरुघुरात हय आरौ पाएँ। चकित बिलोकत कान उठाएँ।।
English explanation
Hearing the horse's approach, the boar grunted and looked alertly about with its ears raised.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| घुरुघुरात | घुरघुराता हुआ | grunting |
| हय | घोड़े की | of the horse |
| आरौ | आहट | sound of approach |
| पाएँ | पाकर | on hearing |
| चकित | चौंकन्ना | alert |
| बिलोकत | देखता हुआ | looking |
| कान | कान | ears |
| उठाएँ | उठाकर | having raised |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.156
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 162
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 161, 162
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।