बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
फिरत बिपिन नृप दीख बराहू। जनु बन दुरेउ ससिहि ग्रसि राहू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दराजाने वनमें फिरते हुए एक सूअरको देखा। [दाँतोंके कारण वह ऐसा दीख पड़ता था] मानो चन्द्रमाको ग्रसकर (मुँहमें पकड़कर) राहु वनमें आ छिपा हो। चन्द्रमा बड़ा होनेसे उसके मुँहमें समाता नहीं है और मानो क्रोधवश वह भी उसे उगलता नहीं है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 161 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
फिरत बिपिन नृप दीख बराहू। जनु बन दुरेउ ससिहि ग्रसि राहू।।
बड़ बिधु नहि समात मुख माहीं। मनहुँ क्रोधबस उगिलत नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 1.156 · पुस्तक पृ. 161, 162
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 फिरत बिपिन नृप दीख बराहू। जनु बन दुरेउ ससिहि ग्रसि राहू।।
English explanation
As he roamed the forest, the king saw a boar, as though Rahu had swallowed the moon and hidden in the woods.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| फिरत | घूमते हुए | while roaming |
| बिपिन | वन में | in the forest |
| नृप | राजा को | to the king |
| दीख | दिखाई दिया | appeared |
| बराहू | जंगली सूअर | a wild boar |
| जनु | मानो | as though |
| बन | वन में | in the woods |
| दुरेउ | छिप गया | had hidden |
| ससिहि | चंद्रमा को | the moon |
| ग्रसि | निगलकर | having swallowed |
| राहू | राहु, ग्रहण करने वाला पौराणिक पात्र | Rahu, the mythical eclipse-causing being |
2 बड़ बिधु नहि समात मुख माहीं। मनहुँ क्रोधबस उगिलत नाहीं।।
English explanation
The large moon would not fit inside his mouth, yet, as though overcome by anger, he would not spit it out.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बड़ | बड़ा | large |
| बिधु | चंद्रमा | the moon |
| नहि | नहीं | not |
| समात | समा रहा | fitting |
| मुख | मुँह | the mouth |
| माहीं | में | inside |
| मनहुँ | मानो | as though |
| क्रोधबस | क्रोध के वश में | under anger's sway |
| उगिलत | उगल रहा | spitting out |
| नाहीं | नहीं | not |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.156
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 161
- सहायक विषय
- प्रतापभानुकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 161, 162
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।