बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कोटिन्ह काँवरि चले कहारा। बिबिध बस्तु को बरनै पारा।।
मूल पाठ
कोटिन्ह काँवरि चले कहारा। बिबिध बस्तु को बरनै पारा।।
चले सकल सेवक समुदाई। निज निज साजु समाजु बनाई।।
स्रोत अभिलेख 1.3 · पुस्तक पृ. 283, 284
भावार्थ
मूल पाठ के बादकहार करोड़ों काँवरें लेकर चले। उनमें अनेकों प्रकारकी इतनी वस्तुएँ थीं कि जिनका वर्णन कौन कर सकता है। सब सेवकोंके समूह अपना-अपना साज-समाज बनाकर चले॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 284 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कोटिन्ह काँवरि चले कहारा। बिबिध बस्तु को बरनै पारा।।
English explanation
Porters set out with crores of carrying yokes; who could describe all those varied goods?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोटिन्ह | करोड़ों | crores of |
| काँवरि | कंधे पर ढोने की काँवरें | shoulder carrying-yokes |
| चले | चल पड़े | set out |
| कहारा | कहार; भार ढोनेवाले | porters |
| बिबिध | विविध | varied |
| बस्तु | वस्तुओं को | goods |
| को | कौन | who |
| बरनै | वर्णन कर | describe |
| पारा | सकता है | could |
2 चले सकल सेवक समुदाई। निज निज साजु समाजु बनाई।।
English explanation
All the groups of attendants set out, each having prepared their own equipment and supplies.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चले | चल पड़े | set out |
| सकल | सभी | all |
| सेवक | सेवकों के | of attendants |
| समुदाई | समूह | groups |
| निज | अपनी | their own |
| निज | अपनी | respective |
| साजु | साज-सज्जा; उपकरण | equipment; outfitting |
| समाजु | सामग्री का जुटाव | assembled supplies |
| बनाई | तैयार करके | having prepared |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 284
- सहायक विषय
- दशरथजीके पास जनकजीका दूत भेजना, अयोध्यासे बारातका प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 283, 284
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।