बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
केहि अवराधहु का तुम्ह चहहू। हम सन सत्य मरमु किन कहहू।।
मूल पाठ
केहि अवराधहु का तुम्ह चहहू। हम सन सत्य मरमु किन कहहू।।
कहत बचत मनु अति सकुचाई। हँसिहहु सुनि हमारि जड़ताई।।
स्रोत अभिलेख 1.78 · पुस्तक पृ. 94, 94
भावार्थ
मूल पाठ के बादतुम किसकी आराधना करती हो और क्या चाहती हो? हमसे अपना सच्चा भेद क्यों नहीं कहतीं? [पार्वतीने कहा—] बात कहते मन बहुत सकुचाता है। आपलोग मेरी मूर्खता सुनकर हँसेंगे॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 94 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 केहि अवराधहु का तुम्ह चहहू। हम सन सत्य मरमु किन कहहू।।
English explanation
‘Whom do you worship, and what do you desire? Why not tell us your true purpose?’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| केहि | किसकी | whom |
| अवराधहु | आराधना करती हो | do you worship |
| का | क्या | what |
| तुम्ह | तुम | you |
| चहहू | चाहती हो | desire |
| हम | हम | us |
| सन | से | to |
| सत्य | सच्चा | true |
| मरमु | भीतरी अभिप्राय | inner purpose |
| किन | क्यों नहीं | why not |
| कहहू | बताती हो | tell |
2 कहत बचत मनु अति सकुचाई। हँसिहहु सुनि हमारि जड़ताई।।
English explanation
‘My heart feels very hesitant to speak; you will laugh on hearing my foolishness.’ The reading ‘बचत’ is uncertain; this translation follows the possible intended reading ‘बचन’ (words).
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहत | कहते हुए | while saying |
| बचत | वचन; अपनी बात। | Words; what one wishes to say. |
| मनु | मेरा मन | my heart |
| अति | बहुत | greatly |
| सकुचाई | संकोच करता है | feels hesitant |
| हँसिहहु | आप हँसेंगे | you will laugh |
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| हमारि | मेरी | my |
| जड़ताई | मूर्खता | foolishness |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.78
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 94
- सहायक विषय
- सप्तर्षियोंकी परीक्षामें पार्वतीजीका महत्त्व
- मुद्रित पृष्ठ
- 94, 94
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।