बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मनु हठ परा न सुनइ सिखावा। चहत बारि पर भीति उठावा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमनने हठ पकड़ लिया है, वह उपदेश नहीं सुनता और जलपर दीवाल उठाना चाहता है। नारदजीने जो कह दिया उसे सत्य जानकर मैं बिना ही पाँखके उडऩा चाहती हूँ॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 94 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मनु हठ परा न सुनइ सिखावा। चहत बारि पर भीति उठावा।।
नारद कहा सत्य सोइ जाना। बिनु पंखन्ह हम चहहिं उड़ाना।।
स्रोत अभिलेख 1.78 · पुस्तक पृ. 94, 94
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 मनु हठ परा न सुनइ सिखावा। चहत बारि पर भीति उठावा।।
English explanation
‘My mind is set in its stubborn resolve and will not heed advice; it wants to build a wall upon water.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मनु | मेरा मन | my mind |
| हठ | हठ में | in stubborn resolve |
| परा | पड़ गया है | has become fixed |
| न | नहीं | not |
| सुनइ | सुनता है | heeds |
| सिखावा | समझाने की बात | advice |
| चहत | चाहता है | wants |
| बारि | पानी | water |
| पर | पर | upon |
| भीति | दीवार | a wall |
| उठावा | खड़ी करना | to build |
2 नारद कहा सत्य सोइ जाना। बिनु पंखन्ह हम चहहिं उड़ाना।।
English explanation
‘I have accepted what Narada said as true; I wish to fly without wings.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नारद | देवर्षि नारद ने | the divine sage Narada |
| कहा | जो कहा | what he said |
| सत्य | सत्य | true |
| सोइ | उसी को | that very thing |
| जाना | मैंने माना | I accepted |
| बिनु | बिना | without |
| पंखन्ह | पंखों के | wings |
| हम | मैं | I |
| चहहिं | चाहती हूँ | wish |
| उड़ाना | उड़ना | to fly |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.78
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 94
- सहायक विषय
- सप्तर्षियोंकी परीक्षामें पार्वतीजीका महत्त्व
- मुद्रित पृष्ठ
- 94, 94
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