बालकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रिषिन्ह गौरि देखी तहँ कैसी। मूरतिमंत तपस्या जैसी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दऋषियोंने [वहाँ जाकर] पार्वतीको कैसी देखा, मानो मूॢतमान् तपस्या ही हो। मुनि बोले— हे शैलकुमारी! सुनो, तुम किसलिये इतना कठोर तप कर रही हो?॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 94 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
रिषिन्ह गौरि देखी तहँ कैसी। मूरतिमंत तपस्या जैसी।।
बोले मुनि सुनु सैलकुमारी। करहु कवन कारन तपु भारी।।
स्रोत अभिलेख 1.78 · पुस्तक पृ. 94, 94
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 रिषिन्ह गौरि देखी तहँ कैसी। मूरतिमंत तपस्या जैसी।।
English explanation
The sages saw Gauri there as though austerity itself had taken bodily form.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रिषिन्ह | ऋषियों ने | the sages |
| गौरि | गौरी, पार्वती को | Gauri, Parvati |
| देखी | देखा | saw |
| तहँ | वहाँ | there |
| कैसी | किस रूप में—ऐसी | in what form—as follows |
| मूरतिमंत | मूर्त रूप धारण किए हुए | embodied |
| तपस्या | तपस्या | austerity |
| जैसी | के समान | like |
2 बोले मुनि सुनु सैलकुमारी। करहु कवन कारन तपु भारी।।
English explanation
The sages said, ‘Listen, daughter of the mountain! Why are you undertaking such severe austerity?’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बोले | बोले | said |
| मुनि | मुनि, ऋषि | the sages |
| सुनु | सुनो | listen |
| सैलकुमारी | हे पर्वतराज की पुत्री पार्वती | O Parvati, daughter of the mountain king |
| करहु | तुम करती हो | you undertake |
| कवन | किस | what |
| कारन | कारण से | for reason |
| तपु | तपस्या | austerity |
| भारी | कठोर | severe |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- बालकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 1.78
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 94
- सहायक विषय
- सप्तर्षियोंकी परीक्षामें पार्वतीजीका महत्त्व
- मुद्रित पृष्ठ
- 94, 94
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